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जय जज 11(/४ ॥(५॥॥, , , , श का कितना दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता के इतने वर्ष पश्चात् भी किसानों को सिंचाई कर पे, १डे बढ़े नुधायशी भवन बनाने कौ अपेक्षा सिंचाई की छोटी योजनाएँ बनाना और क्रिया कप 9, १ साधने ऐसे भी उदाहरण आ चुके हैं जब सरकारी कागज़ों में कुएँ खुदबाने के लिए धन- व्यय, किंतु वे कुएँ कभी खोदे ही नहीं गए।, है सक्रिय राष्ट्रीय नीति कौ आवश्यकता है। यदि निम्न और मध्यम वर्ग पु, ९ आवश्यक बस्तुएँ नहीं मिलेंगी तो असंतोष बढ़ेगा और हमारी स्वतंत्रता के लिए पुनः खतरा ञ्ध, , , , , , , , , , , , प्छ, , , , , “धर “जज ड1 निबंध-- ७ ग़रीबी की मार,, (9 महंँगाई-सुरसा का मुँह।, , , , ९, # निर्धनता को चक्की में पिसता आम 3, , , , 8. शिक्षा में रवेल-कूद का महत्व तय, (कक: 2009 5-6, 202 5६०4, 2015 5७-८, 2016 5७४-4, 2019 उल्लास का, , [ भूमिका, खेलों के प्रकार, कार्यक्षमता में वृद्धि, सहयोग की भावना, देश ब, साहस, आत्मविश्वास, उपसंहार ] जि, , में खेलों का बड़ा महत्व है। पुस्तकों में उलझकर थका-मांदा विदयार्थी जब खेल के मैदान में जात. ये मूख, है तो उसकी थकावट तुरंत गायब हो जाती है। विद्यार्थी अपने में चुस्ती और ताज़गी अनुभव करता है। मानव जौवन कह, में सफलता के लिए मानसिक; शारीरिक और आत्मिक शक्तियों के विकास से जीवन संपूर्ण बनता है। . अनुश, खेल दो प्रकार के होते हैं। एक बे जो घर में बैठकर खेले जा सकते हैं। इनमें व्यायाम कम तथा मनोरंजन 1., होता है, जैसे--शतरंज, ताश, कैरमबोर्ड आदि। दूसरे प्रकार के खेल मैदान में खेले जाते हैं, जैसे--क्रिकेट, फुटबॉल, ., जॉलीबॉल, बॉस्केट बॉल, कबड्डी आदि। इन खेलों में व्यायाम के साथ-साथ मनोरंजन भी होता है। |, स्वस्थ, प्रसन्न, चुस्त और फुर्तीला रहने के लिए शारीरिक शक्ति का विकास ज़रूरी है। इस पर ही मानसिक तथा. निशि, आत्मिक विकास संभव है। शरीर का विकास खेल-कूद पर निर्भर करता है। सारा दिन काम करने और खेल के मैदान. सत्व, का करने से होशियार विद्यार्थी भी मूर्ख बन जाते हैं। यदि हम सारा दिन कार्य करते रहें तो शरीर में घबराहट,, च् या सुस्ती छा जाती है। ज़रा खेल के मैदान में जाइए, फिर देखिए घबराहट, चिड़चिड़ापन या सुस्ती कैसे, , विद्यार्थी -जीवन, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , तक, , दूर भागते हैं। शरीर हल्का-फुल्का और साहसी बन जाता है। मन में और अधिक कार्य करने की जञ पैदा होती वि, खेलों द्वारा मिल-जुलकर काम करने की भावना पैदा होती है। विद्यार्थी सहयोग से सब काम काम करते हैं। यह. आ, सहयोग की भावना उनके भावी जीवन में काम आती है। खेलों दूवारा एक-दूसरे से आगे बढ़ने की भावना दृढ़ होती... तः, है। इस प्रकार विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की होड़ में रहते हैं। परीक्षाएँ पास करते समय भी बे इसी... 3, भावना से प्रथम आते हैं तथा उत्तीर्ण होते हैं। कक, , खेलों का सबसे बड़ा महत्त्व तो यह है कि खिलाड़ी में खेल की भावना पैदा होती है। वह हार-जीत को, , खुशी स्वीकार करता है। खेलें हमारे मन में आत्म-विश्वास की भावना भरती हैं। अत: शिक्षा के साथ-साथ खेलों क ी, जाना चाहिए।, , | काले से विद्यार्थी खेल के मैदान में से अनेक शिक्षाएँ ग्रहण करता है। खेलें संघर्ष दूबारा विजय प्र, करने की भावना पैदा करती हैं। खेलें हँसते-हँसते अनेक कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करना सिखा देती हैं। खेल के, में से विद्यार्थी के अंदर अनुशासन में रहने की भावना पैदा होती है। सहयोग करने तथा भ्रातभाव की आदत, खेल-कूद से विद्यार्थी में तन्मयता से कार्य करने कौ प्रवृत्ति पैदा होती. है। पर, + आजकल विद्यालयों में खेल-कूद को प्राथमिकता नहीं दी जाती। केवल वही विद्यार्थी ४ मैदान, जल जोकि टीमों के सदस्य होते हैं। शेष विद्यार्थी किसी भी खेल में भाग नहीं ले पाते। प्रत्येक, , , , , का प्रबंध होना चाहिए जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी भाग लेकर अपना शारीरिक तथा मानसिक रि, , 1