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| हु नाम से जानी जाती है।, उग्ंव जैसे-जैसे झारखण्ड में प्रवेश करते गए मुण्डा पूर्व की ओर, , स्थानान्तरित होते हुए तथा अन्ततः रांची के पूर्वी एवं दक्षिणी भाग में, स्थायी रूप से बस गए। यही कारण है कि मुण्डा लोगों का अनुपात, पश्चिम से पूर्व की ओर निरन्तर बढ़ता गया है जबकि उरांव लोगों, का पूर्व से पश्चिम की ओर।, , सामाजिक दशाएं, मुण्डा अपने को होरोको (80२0/60) कहते हैं जिसका अर्थ, , आदमी होता है। मुण्डारी भाषा में मुण्डा शब्द का अर्थ प्रतिष्ठा तथा, संवृद्धि से युक्त व्यक्ति होता है। प्रजातीय गुणों के आधार पर इन्हें, प्रोटोआस्ट्रेलॉयड माना जाता है तथा मुण्डारी बोली को आस्ट्रोएशियाटिक परिवार से सम्बन्धित माना जाता है।, , परिबार तथा सम्पत्ति में अधिकार--मुण्डा जनजाति में परिवार की, गुंथित व्यवस्था पाई जाती है, क्योंकि माता-पिता तथा अविवाहित बच्चे, परिवार के सदस्य होते हैं। मुण्डा समाज में सम्पत्ति पर लड़कियों का, अधिकार नहीं होता। यहां तक कि अगर किसी व्यक्ति का लड़का, नहीं है तो लड़की के बच्चों को भी परिवार की सम्पत्ति में अधिकार, नहीं दिया जाता है। बेटे के अभाव में कोई मुण्डा सदस्य अपने ही, समुदाय के किसी लड़के को गोद ले सकता है। लड़की के लिए, माता-पिता अविवाहित रहने तक ही उसके भरण-पोषण के लिए, , उत्तरदावी होते हैं।, गोत्र-मुण्डा समाज में गोत्र की स्पष्ट व्यवस्था मिलती है तथा, , गोत्र को मुण्डा समाज में कीली कहा जाता है। एव. एच. र्जले ने, मुण्डा लोगों में मिलने वाली गोत्र व्यवस्था का विस्तृत वितरण अपनी, 7/%867 ७४६ ८६७/८५ रण 8८7६४ में प्रस्तुत किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि प्रत्येक कीली के लोग अपने को एक ही, पूर्वज के सदस्य मानते हैं। इनके गोत्र का नामकरण भी पशु, पक्षी,, पौधा इत्यादि पर आधारित है; जैसे भेंगरा घोड़ा से, पूर्ति मगरमच्छ, से, आइन्द एक विशिष्ट प्रकार के जीव से, सम्बन्धित है। नमक,, , फूछ इत्यादि को भी गोत्र चिह्न के रूप में मान्यता, , पुस्तक 7॥6, , को, एक गोत्र के सभी सदस्य महिला तथा पुरुष कक, के रूप में स्वीकार करते हैं। अतः एक गोत्र के अन्दर, >> में विवाह की प्रथा नहीं पाई जाती है।, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , थी - िमिक नग खमाज में ग्राम पंथ, काल से ही रही, , परहा राजा, दिवान, ठाकर, >., , ला े जाने जाते हैं। परहा राजा, परहा पंचायत का पुछ,, प्रकार के विवादों को सुलझाने में मड़ल५, , है।, पर आांव समाज की तरह ही मुण्डा युवक तथा युद॑त, जिसे गौइतिओरा (6०८ ॑क्रंणन) कहा जाता, , हद तथा युवती अपना समय व्यतीत करते है, अपने समाज के शीति-रिवाजों, परम्पराओं , नियमों , कृषि क्, , का प्रशिक्षण दिया जाता है।, हिल समाज में विवाह की बात शुभ घड़ी (सुर, , प्रारम्भ की जाती है जिसे "० 00/:0' कहा जाता, बाद लड़के का पिता विवाह की वात को आगे बढ़ाने के डि, के घर एक व्यक्ति को भेजता है जिसे दूतम (000., जाता है। 2., मुण्डा समाज में कन्या मूल्य की प्रथा मिलती है जो दिवह दे, समय लड़के वालों को लड़की पक्ष को अदा करना, धर्म तथा त्योहार--मुण्डा समाज में सबसे महत्वपूर्ण, बोंगा को माना जाता है। इसके बाद हातु बोंगा का, देसौली, जाहेर, बुढ़ी चंडी योंगा इत्यादि नामों से भभ, है। इनकी पूजा पाहन के द्वारा की जाती है। मरांग, का एक अन्य देवता है। ऐसा माना जाता है कि मरां, सूखा तथा महामारी से रक्षा करने में सहायता करता, मुण्डा समाज में तीन स्थानों का महत्व सबसे अधिक होताह, ). सरना--गांव के देवता का निवास स्थान,, 2. अखरा--गांव के मध्य में स्थित खुला स्थान जिसका उपड, पंचायत की बैठक, नाच-गाना इत्यादि के लिए होता *, 3. सासन--इसे मसना भी कहा जाता हैं, का कब्रगाह होता है। व्यक्ति को दफनाने, समीप दक्षिण की ओर पत्थर गाड़े जाते हैं, मुण्डा समाज की अर्थव्यवस्था, कृषि मुण्डा समाज की अर्थव्यवस्था का मुख, मानवशास्त्रियों के अनुसार प्रारम्भ में मुण्डा झारख, पश्चिमी भाग में निवास करते थे जहां इनके द्वारा प्र, कृषि की जाती थी जिसने बाद में स्थायी जीवन निवरहिद, रूप धारण कर लिया।, उगंव लोगों के आगमन से मुण्डा, पूर्व की ओर स्थानान्त, गए तथा जंगलें को साफ कर कृषि कार्य प्रारम्भ किया इनक है|, भूमि को तीन वर्गों में बांटा जाता है :, द . पांकु-यह निचली भूमि है जो पंक मिट्टी से निर्मित, इसमें आर्द्रता ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है ?, प्रयोग धान की कृषि के लिए किया जाता है।, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , 508॥॥60 शां॥ 0॥56क्वाशश