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(_खंड “क'- क्षितिज-2 (काव्य खंड) ), उत्साह, अट नहीं रही है, , - सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला!, , , , पाठ की रूपरेखा, , *उत्साह' एक आहवान गौत है जो बादल को संबोधित है। बादल निराला का प्रिय विषय है। कविता में बादल एक तरफ़ पौड़ित-प्यासे, जन की आकारक्षा को पूरा करने वाला है, तो दूसरी तरफ़ वही बादल नई कल्पना और नए अंकुर के लिए विध्वंस, विप्लब और क्रांति, चेतना को संभव करने वाला भी। कवि जीवन को व्यापक और समग्र दृष्टि से देखता है। कविता में ललित कल्पना और क्रांति-चेतना, दोनों हैं। सामाजिक क्रांति या बदलाव में साहित्य को भूमिका महत्वपूर्ण होती है, निराला इसे 'नवजीवन” और “नूतन कविता” के, संदर्भों में देखते हैं।, , *अट नहीं रहो है' कविता फागुन को मादकता को प्रकट करती है। कवि फागुन कौ सर्वव्यापक सुंदरता को अनेक संदभों, में देखता है। जब मन प्रसन्न हो तो हर तरफ़ फागुन का ही सौंदर्य और उल्लास दिखाई पड़ता है। सुंदर शब्दों के चयन एवं लय ने, कविता को भी फागुन की ही तरह सुंदर एवं ललित बना दिया है।, , पाठ का सार, , , , 1. उत्साह, , , , , , , , उत्साह एक आह्वान गीत है, जिसके माध्यम से कवि ने बादल को संबोधित किया है। बादल निराला का प्रिय विषय है। कविता में, बादल एक तरफ़ पीड़ित-प्यासे जन की अभिलाषा पूरा करने वाला है, तो दूसरी तरफ़ वही बादल नई कल्पना और नए अंकुर के लिए, विप्लव, विध्वंस और क्रांति चेतना को संभव करने वाला भी है। कवि जीवन को व्यापक दृष्टिकोण से देखता है। कविता में ललित, कल्पना और क्रांति-चेतना दोनों हैं। सामाजिक क्रांति या सामाजिक परिवर्तन में साहित्य की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है, निराला इसे, “नवजीवन' और 'नूतन कविता' के संदर्भों में देखते हैं। कवि निराला ने बादल के माध्यम से मानव को प्रोत्साहित किया है, उसके, उत्साह को प्रेरित किया है।, , काव्यांश का अर्थ, कु बादल गरजो!- विदूयुत-छबि उर में, कवि, नवजीबन वाले!, घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ! बज्र छिपा, नूतन कविता, ललित ललित, काले घुघराले, फ़िर भर दोबाल कल्पना के-से पाले, बादल, गरजो!, , (पृष्ठ से 33), शब्दार्थ, गरजो-गर्जना करो। घेर-बेर-घिर-धिरकर। घोर-भयावह। गगन-आकाश। धाराधर-बादल। ललित-सुंदर। विद्रयुत-छबि-विजली की, आभा। उर-हृदय | नूतन-नई।, अर्थ, , कवि निराला जी उत्साह और क्रांति के प्रतीक रूप बादल को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि तुम अपनी भयावह गर्जना करो और मनुष्यों, में नई चेतना भर दो।
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कवि फाल्गुन से कह रहा है कि हे फाल्गुन! जब तुम श्वास लेते हो तो अपनी छोड़ती हुई श्वास के साथ सुगंध से चारों और प्रसन्नता, भर देते हो। पर्यावरण श्वास के साथ महक उठता है। इतना ही नहीं अपनी सुगंध में पर (पंख) लगाकर आकाश में उड़ जाते हो,, जिससे आकाश भी सुगंधित हो उठता है। कवि सौंदर्य से भरपूर फाल्गुन-माह के सौंदर्य से अभिभूत होकर उसे निरंतर निहारता है। वह, सौंदर्य-दर्शन से अपनी दृष्टि को हटा पाने में असमर्थ हो गया है। वह देख रहा है कि नव-पल्लवों से लदी पेड़ों की शाखाओं पर कहीं, हरी-हरी पत्तियाँ हैं तो कहीं नव-प्रस्फुटित लाल-लाल कोमल पत्तियाँ दिखाई दे रही हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि फाल्गुन के हृदय पर, मंद-मंद गंध को अप हुई पुष्प-माला पड़ी हुई है। इस तरह सौंदर्य से भरपूर फाल्गुन की शोभा सब जगह इतनी फैल रही है कि कहीं, भी समा नहीं पा रही है।, , , , अभ्यास प्रश्नोत्तर |, [ उत्साह ], 1. बहुविकल्पीय प्रश्न, 1. इस कविता में कवि द्वारा किसका आहवान किया जा रहा है?, (/)) वर्षा का (॥) बादलों का (॥/) पक्षियों का (४४) बिजली का, 2. कवि ने बादलों को किसके समान सुंदर बताया है?, (0) चंचल पक्षी के समान (#॥) काले घुँघराले बालों के समान, (॥/) नाचते मोर के समान (४) बहती नदी के समान, 3. कवि ने बादलों को किस कल्पना के समान पाले हुए बताया है?, (0) बाल कल्पना (॥) युवा कल्पना (॥/) वृद्ध कल्पना (/४) इनमें से कोई नहां, 4. बादलों के उर (हृदय) में कौन-सी शक्ति छिपी है?, (0) समुद्र की (४) नदी कौ (॥/) बज्र्पात करने की (४४) उपर्युक्त सभी, 5. कवि का 'नूतन कविता' से क्या अभिप्राय है?, (0) नवीन प्रेरणा (४) नवजीवन (॥/) (क) व (ख) दोनों में (#) इनमें से कोई नहीं, 6. सभी लोग किस वजह से दुखी हैं?, (0) भयंकर गरमी के कारण (४) वर्षा होने के कारण, (॥/) सरदी के कारण (४) जल भराव के कारण, 7. कवि ने 'अनंत के घन' कहकर किसे संबोधित किया है?, (0) नदियों को (॥/) बादलों को (॥॥) वर्षा को (/७) बिजली को, 8. कवि को सारी धरती जलती-सी क्यों प्रतीत हो रही है?, (४) तेज गरमी के कारण (॥) वर्षा के कारण (॥/) हवा न चलने के कारण (/४) उपर्युक्त सभी, 9. बादलों के मूसलाधार बरसने से कया होगा?, (0) धरती कौ ऊष्णता कम होगी। (४) लोगों को तपन व बेचैनी से राहत मिलेगी।, (॥/) सभी को सुख का अनुभव होगा। (//) उपर्युक्त सभी।, 10. 'उन्मन' का सही अर्थ है-., (0) उद्विग्न (॥#) अनमनापन (॥॥/) संपूर्ण (#)) अनंत, अट नहीं रही है, , , , , , , , 11, इस कविता में किस ऋतु का वर्णन है?, (1) ग्रीष्म (४) वसंत (॥/) शरद (#0 वर्षा, 12. फागुन घर को किस प्रकार सुगंध से भर देता है?, (0) अपने फूल खिलाकर (४) अपने बिचारों से (॥/) अगरबत्ती जलाकर (/४) अपनी श्वास से
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13, फागुन के सौंदर्य को देखकर कवि कौ कैसी स्थिति हो गई है?, , (0) वह प्रकृति के सौंदर्य का दीवाना हो गया। (॥/) उसका मन इस सौंदर्य में द्ूब गया।, (॥/) वह फागुन के सौंदर्य में बैंधकर रह गया। (/४) उपर्युक्त सभी।, 14, फागुन माह में वन-उपबन कैसे लगते हैं?, (0) महक उठते हैं (॥) फूल खिलने लगते हैं।, (॥/ पेड़ों पर नए-नए पत्ते आ गए हैं। (४0) उपर्युक्त सभी।, 15, 'उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो' में कौन-सा अलंकार है?, (0) उपमा (॥/) रूपक (0) यमक (४0) श्लेष, उत्तर- |, (॥) 2. (#) 3. (0 हा । 5. (#) 6., 7 (0) है. (0 9. (४) 10, (४0) 11, (४) 12, (७), 13, (७0) 14. (७) 15. (॥#), , 1. काव्यबोध संबंधी प्रश्न (2 अंक ), 1. “उत्साह” में 'नव-जीवन वाले” किसके लिए और क्यों प्रयोग किया है?, उत्तर (/) कवि ने “नव-जीवन वाले' बादलों के लिए प्रयोग किया है क्योंकि बादलों की विशेषता है कि तप्त धरती के ताप को शांत, कर प्रकृति को नया-जीवन देते हैं। प्रकृति की प्रफुल्लता के साथ-साथ इनके दूवारा पशु-पक्षी, मानवों तक में नवीन उत्साह, का संसार होता है। अतः इस संदर्भ में बादलों को 'नव-जीवन वाला' कहना सर्वथा उपयुक्त है।, (#) कवि भी बादलों से गरजने की अपेक्षा करते हुए स्वयं भी निराशा में आशा का संचार बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित, करता है। अतः 'नव-जीवन वाले' कहना सार्थक है।, 2. “उत्साह” कविता में कवि क्या संदेश देता है?, उत्तर 'उत्साह' कविता में कवि का जन-सामान्य के लिए संदेश है कि बादलों की तरह तुममें भी इतना उत्साह हो, इतनी गर्जना हो, इतना, ओज हो, जिससे विश्व में तुम्हारा प्रभाव स्थापित हो। तुम अपनी गर्जना से निराश हुई भावना में पुनः चेतना भर दो। तप्त धरती, अर्थात् मानव-पीड़ा को दूर करने में समर्थ हों। तुम हृदय में वज़-शक्ति धारण करो।, 3. 'उत्साह' और 'अट नहीं रही है” कबिता के आधार पर कवि के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।, उत्तर 'उत्साह' कविता में निराला की छवि स्वाभिमानी है, उसमें उत्साह है, पौरुष है, गर्जना है। उनकी वाणी में जन-सामान्य में नवीनता का, संचार करने वाली ओजस्विता है। उनके हृदय में जन-सामान्य के प्रति संवदेना है, सहानुभूति है। इसलिए बादलों से गर्जने, बरसने की, कामना करते हैं, जिससे गर्मी के कारण उनकी विकलता, उदासीनता दूर हो जाए।, “अट नहीं रही है' कविता में कवि का मन प्रकृति-सौंदर्य-प्रेमी है, प्रकृति में समायी सुंदरता का सूक्ष्मदर्शी है। कवि प्रकृति की सुंदरता में, केवल आनंद-विभोर नहीं होता है प्रकृति के नव-पललवों का चित्रण भी करता जाता है। इससे उनके सूक्ष्मदर्शी होने का संकेत, मिल्लता है। कवि इतना प्रकृति-प्रेमी है उसकी सुंदरता को निरंतर निहारते रहने पर भी दृष्टि नहीं हटती है।, 4. “अट नहीं रही है” तथा कविता में कवि का क्या संदेश है?, उत्तर 'अट नहीं रही है' कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि फागुन में प्रकृति का सौंदर्य सर्वत्र व्याप्त है। वृक्षों की शाखाएँ प्रकृति की, सुंदरता से सजी हुईं अपना वैभव तथा सौंदर्य बिखेर रही हैं। प्रकृति में पूरा उन्माद है। कवि की तरह प्रकृति के सौंदर्य-दर्शन का खूब, लाभ उठाएँ। थके-माँदे जीवन में प्रसन्नता का अनुभव करें। इतने प्रफुल्ल हों, इतने आनंदित हों कि फागुन की सुंदरता की तरह हमारी, खुशियाँ भी अन॑त हों।, 5 कक न की कमाना हलक ओका मेक अपना प्रभाव दिखाती है, उसका चित्रण मनुष्यों के दुवारा कैसे किया जाता, ? स्पष्ट ।, उत्तर फागुन की आभा प्राकृतिक सौंदर्य की आभा है। मनुष्यों में जो देखने को मिलता है, वह होली के रंगों और होली के लोक-गीतों में, प्रस्फुटित हो उठता है। मानव सर्वथा प्रफुल्लित दिखाई देता है। वह होली के रंगों में रंगा चितकबरा दिखाई देता है। उसके चितकबरे, रंग उसकी प्रसन्नता को प्रकट करते हैं।, 6. बादलों की गर्जना का आहवान कवि क्यों करना चाहता है? “उत्साह' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।, (९:5६ 4॥ ॥७॥4, 00/॥ 2018), उत्तर कवि बादलों की गर्जना का आहवान इसलिए करना चाहता है ताकि लोगों का आलस्य और अकर्मण्यता दूर हो जाए और बे, नवनिर्माण के लिए तैयार हो जाएँ।, 7. “अट नहीं रही है' कविता के आधार पर बसंत ऋतु की शोभा का वर्णन कीजिए। ((%%8 00॥ 2019), उत्तर प्रकृति के कण-कण में सुंदरता, जगह-जगह पर रंग-बिरंगे फूल और सुगंधित बाताबरण, चारों ओर हरियाली, जन-जन का मन, प्रफुल्लित हो जाना।