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सिरिल बर्ट ने कहा "पिछड़ा बालक वह है ,जो अपने अध्ययन के मध्यकाल में ही, अपनी कक्षा का कार्य, जो उसकी आयु के अनुसार एक कक्षा के नीचे का है, करने में, असमर्थ रहता है"।, , सोनल के अनुसार "पिछड़ा बालक वह है जो अपनी आयु में अन्य बात्रकों की तुलना, में अत्यधिक शैक्षणिक दुर्बलता का परिचय देता है"।, , बर्टन हारठेल के अनुसार "सामान्यता पिछड़ेपन का प्रयोग उन बालकों के लिए होता, है जिनकी शैक्षणिक उपलब्धि उनकी स्वाभाविक योग्यताओं के स्तर से कम हो ।", , पिछड़े बालकों की बुद्धि लब्धि, , पिछड़े बालकों की बुद्धि लब्धि को लेकर कुछ मनोवैज्ञानिकों का मत अलग-अलग, प्रकार है लेकिन अधिकतर मनोवैज्ञानिक पिछले बालकों की बुद्धि लब्धि को 85 से, कम मानते हैं, , पिछड़ी बालकों की समस्याएं या विशेषताएं, , “पिछड़े बालकों की बुद्धि ्रब्धि कम होने के कारण उनके सीखने की गति अत्यंत, धीमी होती है
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“पिछड़े बालक सामान्य विद्यालय के पाठ्यक्रम में भी पिछड़ जाते हैं और वे उनका, लाभ नहीं उठा पाते।, , “पिछड़े बालक मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं तथा विद्यालयों में आसानी से, समायोजन नहीं कर पाते और साथ ही साथ संवेगात्मक इष्टि से भी असंतुलित रहते, , हैं।, , “पिछड़े बालक अपने आप को हीन वे निराश समझते हैं तथा उनकी महत्वाकांक्षा, समाप्त हो जाती हैं और नेतृत्व करने में भी असमर्थ होते हैं, , “पिछड़े बालक सदैव एक दूसरे की मित्रता वह सहानुभूति की आवश्यकता महसूस, करते हैं तथा उनमें सोचने समझने की क्षमता निम्न होती है।, , “पिछड़े बालक हीन तथा निराशावादी होने की वजह से समाज विरोधी कार्य, करने में लिप्त होने लगते हैं।, , “बालक के पिछड़ापन होने के कुछ मुख्य कारण, , सामान्य बालकों की अपेक्षा बुद्धि का कम होना।, ब्कुछ बच्चों में शारीरिक दोष के कारण या रोग के कारण पिछड़ापन हो जाता है।, , *पारिवारिक वातावरण अगर दूषित हो कलह,हीन भावना सुख शांति का अभाव तो, भी बच्चा पिछड़ जाता है।
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बर्ट महोदय ने अपने अध्ययन में पाया कि 12% बालक का पिछड़ापन उनके परिवार, का दूषित वातावरण मे होना था |, , *विद्यालय का वातावरण के कारण उपयुक्त शिक्षण व्यवस्था या शिक्षक न होने के, कारण ही बालक बछड़ जाते हैं बर्ट महोदय ने अपने अध्ययन में 8% पिछड़ने का, कारण विद्यालय को बताया।, , *संवेगात्मक स्थिति के कारण यदि बालक संवेगात्मक रूप से अस्थिर , क्रोधित ,, व्याकुल्ता ,सुस्ती, उदासीनता, तनाव आदि में अधिक रहता है वह वाला भी पिछड़, जाता है।, , बालक के पिछड़ने के कुछ अन्य कारण भी होते हैं जैसे शैक्षिक परिपक्वता रूचि का, अभाव पास पड़ोसी का वातावरण को कुसंग वातावरण कक्षा में से भाग जाना, राजनीतिक दल बंदी आदि कारणों से भी बाल पिछड़ जाता है।, , पिछड़े बालकों के पिछड़ेपन को दूर करना तथा उनकी शिक्षा व्यवस्था करना।, , स्टोंस महोदय ने अपने शब्दों में कहा कि "आजकल पिछड़ेपन के क्षेत्र में किया जाने, वाला अधिकांश अनुसंधान यह सिद्ध करता है कि उचित ध्यान दिए जाने पर पिछड़े, बालक की शिक्षा में प्रगति की जा सकती है अतः ऐसे बालको शिक्षा की ओर समुचित
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ध्यान देकर उन्हें राष्ट्र के निर्माण में भागीदारी करने लायक बनाया जा सकता है, तथा पिछड़े बालको उचित प्रोत्साहन देकर, , पिछड़े बालकों की शिक्षा व्यवस्था में निम्न ध्यान रखना चाहिए, , 1. विशिष्ट विद्यालय की व्यवस्था करके -- पिछड़े बालकों के लिए अलग से, , विद्यालय की स्थापना कर देनी चाहिए। यदि बालक विद्यालय मे सहवासीय, हो जाए तो बहुत ही अच्छा हो सकता है। ताकि उनका आसानी से उपचार, किया जा सके प्रोफेसर उदय शंकर ने अपने शब्दों में कहा है कि यदि पिछड़े, बालक को सामान्य बालकों के साथ शिक्षा दी जाए तो वह और अधिक पिछड़, जाएंगे लेकिन यदि उनको अलग विद्यालय की सुविधा प्रदान कर दी जाए तो, उनकी कमियों को काफी हद तक दूर किया जा सकता है |, , . विशिष्ट कक्षाएं देकर - यदि पिछड़े बालकों को भी सामान्य बालकों की, ही कक्षा में पढ़ाते हैं तो बार-बार असफल होने के कारण, उनकी मन स्थिति में नकारात्मक पर्वती जन्म ले लेती है, जिस कारण वह और अधिक बिछड़ जाते हैं इसलिए ऐसे, बच्चों को हलक से कक्षाएं देनी चाहिए जिसमें स्टोंस, महोदय ने बताया था कि इन कक्षाओं में छात्र संख्या 20, से अधिक नहीं होनी चाहिए यह कक्षाएं भिन्न-भिन्न विषय, की होनी चाहिए और उनमें सभी पिछड़े बालक को एक, साथ शिक्षा दी जानी चाहिए जिन विद्यालयों में इस प्रकार, की कक्षाओं के ल्रिए पर्याप्त स्थान नहीं हो उनमें एक या