Notes of MANTHAN CLASSES, Child Development अवधान या ध्यान.pdf - Study Material
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किसी वस्तु पर चेतना केन्द्रित करना ध्यान है-मनोवैज्ञानिकों का (कहना था कि ध्यान या अवधान एक मानसिक शक्ति है।, लेकिन वर्तमान मनोवैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि ध्यान अथवा अवधान एक मानसिक शक्ति नहीं है बल्कि एक, मानसिक प्रक्रिया है। चेतना व्यक्ति का स्वाभाविक गुण है। दत्ता के कारण ही उसे विभिन्न वस्तुओं का ज्ञान होता है। यदि, वह कमरे में बैठा हुआ पुस्तक पढ़ रहा है तो उसे वहाँ की सब वस्तुओं की कुछ न कुछ चेतना अवश्य होती है जैसे मेज, की,, , अलमारी आदि पर उसकी चेतना का केन्द्र वह पुस्तक है, जिसे वह पढ़ रहा है।, ।, , चेतना की किसी वस्तु पर इस प्रकार केन्द्रित होने को अवधान कहते, , मानसिक प्रक्रिया को अवधान या ध्यान कहते हैं।, अवधान की परिभाषा, , - ४“., रॉस का अनुसार, अवधान विचार की || वस्तु को<, , |, , 'डम्बिल के अनुसार, अवधान दूसरी े अपेक्षा एक वस्तु २, , अवधान की विशेषताएँ ', , 1. किसी भी रे है मानसिक सक्रियता आवश्यक है।, , 2. किसी व्यू ध्यान केन्द्रित शाप का रह मानसिक तत्परता आवश्यक है।, , लय ;ढ | <ह ।, ३. अवधान बहुत होता है । अवधान एक वस्तु 'पर केन्द्रित होता है जैसे ही दूसरी वस्तु सामने आती है वैसे, , ही अवधान दूसरी वस्तु पर चला, , 4. अवधान केन्द्रित करने अनेक वस्तुओं की अपेक्षा एक !वस्तु पर केन्द्रित कर पाता है; अत: अवधान का विस्तार, , संकुचित है।, 5. अवधान प्रायः अस्थिर होता है एवं वातावरण के अन्य कारकों |की ओर भटकने का प्रयास करता है।, 6. अवधान ज्ञानात्मक, क्रियात्मक और भावात्मक है।, , 7. अवधान में प्रयोजनता रहती है अर्थात जब व्यक्ति किसी वस्तु या विचार पर अवधान केन्द्रित करता है, उसका कोई न कोई, उद्देश्य या प्रयोजन रहता है।, , 81/:- 441 5८457:41:4
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8. अवधान में सजीवता होती है। व्यक्ति जिस वस्तु पर अवधान केन्द्रित नहीं होता उस वस्तु का चित्र व्यक्ति की चेतना में, 1, , अस्पष्ट रहता है। अत: चेतना का कारण अवधान होता है।, , करता है।, , |, ।, 9. अवधान एक चयनात्मक प्रक्रिया है। व्यक्ति अपने अभिरूचि और मनोवृत्ति के अनुसार किसी वस्तु पर अवधान केन्द्रित, ।, 1, , 10. अवधान केन्द्रित करने में इन्द्रियाँ, मुद्रा, मांसपेशियाँ आदि वालावरण के प्रति समायोजन कर लेती है। अत: अवधान में, , समायोजनता रहती है।, , जे.एस. रॉस ने अवधान का वर्गीकरण निम्नानुसार किया है:- (४, 1. ऐच्छिक अवधान :- अर्जित अभिरुचि या.रुचि-पर आधारित हो है। डर, () विचारित : जब हम अच्छी तरह विचार कर किसी विचार र्ष््ं करते हैं। तो वह विचारित ध्यान, , कहलाता, , ॥॥| न ' वे मे हर से होता है।, , 2. अनेच्छिक अवधान : जब अभिरुचियों पर निर्भर होता है। व्यक्ति का ध्यान किसी वस्तु पर केन्द्रित हो, जाता है। यह ण हे होता है; ', , () सहज ध्यान *ज प्रवृत्तियों पर आधारित ', , (1) बाध्य ध्यान-इस प्र के ध्यान में बाध्यता प्रमुख होती है।, 3. अवधान भंग होने के कारण :, , अवधान भंग होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं, 1, ।, , 1. थकान-थकान के कारण व्यक्ति किसी वस्तु पर अवधान केंद्रित नहीं कर पाता है।, 1, , 2. रूचि-जिस वस्तु में व्यक्ति की रुचि नहीं होती है अवधान केंद्रित नहीं कर पाता है।, , 3. अनुचित वातावरण-जैसे तेज गर्मी या सर्दी, वर्षा या ठण्ड भी चाय को अवधान केन्द्रित करने में बाधा डालते हैं।, ।, , 81/:- 441 5८457:41:4
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4. शक्तिशाली प्रेरक-के प्रभाव से अवधान केन्द्रित करने में बाधा आती है। जैसे परीक्षा के समय जोर से लाउडस्पीकर का चलना, 1, , पढ़ाई में अवधान केन्द्रित नहीं हो पाता है। बालक का मन दूसरी (ओर चला जाता है।, , 5. शिक्षण विधियाँ भी बालकों के अवधान केन्द्रित होने में बाधा डालती है।, ।, , 6. व्यक्ति का स्वास्थ्य-ठीक न होने पर अवधान केंद्रित करने में ! बाधा डाल्नता है।, , जब व्यक्ति किसी विशेष वस्तु, व्यक्ति विचार या क्रिया को देखने या जानने के लिए उस पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे होते, , हैं तो हमारे बाहय तथा आंतरिक वातावरण में कोई न कोई घटना या बात ऐसी घटित हो जाती है कि हमारा ध्यान उस उस, ओर चला जाता है जिसके फलस्वरूप हमारे पहले से दिए जा रहे ध्यान की प्रक्रिया में रुकावट या ' नहर है। इस, प्रक्रिया को अवधान भंग होने या व्यवधान कहते हैं। व्यवधान या! अवधान अंग होने के प्ि ऐप, , (1) आंतरिक उदयीपन-सिर दर्द, पेट दर्द, बीमारी, घटना, काम करने, का ब्यव 1४:, (2) बाहय उद्यीपन-गर्मी, सर्दी, तीव्र प्रकाश, शोर, संगीत, आदि की मानसिक ६, , , , की 1 की 1117 के कक के (1 1 की 1 ।॥|, , 81/:- 441 5८457:41:4
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अवधान का विस्तार जात करने हेतु प्रयोग, , अवधान का विस्तार ज्ञात करने में दो दशा मुख्य रूप से सहायका, (अ) बाझ या वस्तुगत दशा में, , (ब) आंतरिक या आत्मगत दशा में, , नर.) -बाहय या वस्तुगत दशाएं, बाहय या वस्तुगत दशाओं में निम्नलिखित दशायें होती हैं :, , प्रकृति (५७७ - जैसे छोटे बच्चों, , आकर्षित रंग, वस्तु आदि।, , 2. उद्यीपक के उद्देश्य (8175 ०08 5011५1५५) - मेज पर रखा, करते हैं।, , 3. आकार (5876) - जो रू बड़े, 4. अवधि (0७7०४०॥) - जो ए रहती है या बार-बार आती है उस ओर अवधान, ।, |, कम होता |, ।, ।, रण बार-बार आती है। उन पर हमारा ध्यान अपने आप चला, ।, , | की पुनरावृत्ति 1, , 6. नवीनता (॥४०४९॥५४) - जो वस्तु के लिए नवीन होते हैं। व्यक्ति का ध्यान आकर्षित करते है। जैसे- नए, , खिलाने, किताबें कपड़े, , 7. तीव्रता (11९10) - दुर्बल उत्तेजनाओं की तुलना तीव्र उत्तेजनायैं व्यक्ति के ध्यान में आकर्षित करती हैं। जैसे हल्की आवाज, , की जगह तीव्र आवाज व्यक्ति को आकर्षित करती है।, , 8. रहस्यात्मकता (52८9८५४) - किसी को देखकर बात करना व्यक्ति का ध्यान उस ओर आकर्षित करता है।, ।, ।, , 9. परिवर्तन ((॥19186) - किसी स्थिति का अचानक परिवर्तन भी व्यक्ति के ध्यान को आकर्षित करता है। जैसे चलते पंखे,, , जलती ट्यूब-लाइट, रेडियो या टी.वी. का अचानक बंद हो जाना उस ओर ध्यान आकर्षित करता है।, , 81/:- 441 5८457:41:4
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10. विषमता ((०॥४४७५() - विषमता व्यक्ति के अवधान को प्रभावित करती है। मोटे व्यक्ति के साथ पतले व्यक्ति का होना ।, 1, , (ब) आंतरिक या आत्मगत दशायें, , 1. आवश्यकता (॥४९९०)- वह वस्तुएँ जो व्यक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, व्यक्ति का ध्यान शीघ्र ही आकर्षित कर, , लेती हैं।, , 2. रुचि (॥111९५()-जिन वस्तुओं में व्यक्ति की रुचि होती है उन्हीं पर ध्यान केन्द्रित होता है।, , 3. आदत (॥1३/10)- व्यक्ति को जिन वस्तुओं या कार्यों की आदत |होती है उन पर उसका अवधान रे है। जैसे-सुबह की, डे न नजर) जैसे-सु, , चाय, अखबार, आदि।, , केन्द्रित रहती हैं।, , भ, 5. मानसिक दशा (॥४९॥४३। (०॥५४०॥)- व्या कोई 5 पर करता है। व्यक्ति का मन कभी, , प्रसन्न होता है तो कभी अप्रसन््न। इन स्थितियों में भी प्रभावित होता है।, 6. प्रशिक्षण (1191178)- प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रशिक्षण क्नैत का ध्यान केंद्रित होने लगता है।, रखता है उस कार्य पर उसका अवधान केंद्रित होता है।, सै स्पष्ट कर दिया है कि बालक की शिक्षा पर उसके पूर्व ज्ञान, का प्रभाव डा व्य में ध्यान केंद्रित होता है।, 9. मनोवृत्ति (8४४11५०६)- व्यक्ति की मनोवृत्ति भी अवधान आलतरत पर प्रभाव डालती है। जिस प्रकार की मनोवृत्ति होती है, , व्यक्ति का ध्यान उसी के अनुसार आव, , 10. अर्थ (॥॥९9॥178)- वेषयों, वस्तु का अर्थ व्यक्ति समझ लेता है। वह व्यक्ति का अवधान केंद्रित कर लेती है।, , |, |, |, रुचि अर्थ विशेषताएँ एवं प्रकार ', 1, ॥, |, , - मेक्डूगल के अनुसार,- "रुचि गुप्त अवधान है, अवधान सक्रिय रुचि है।" इसका अर्थ है कि रुचि अवधान में तथा अवधान रुचि, में प्रदर्शित होती ', , रॉस के अनुसार,- अवधान एवं रुचि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अर्थात रुचि और अवधान एक दूसरे पर आधारित रहते हैं।, , रुचि किसी वस्तु, व्यक्ति या विचार के प्रति सम्बन्ध जोड़ने वालीं मानसिक क्रिया है।, , 81/:- 441 5८457:41:4