Notes of 9th A, Hindi Literature अनुच्छेद लेखन - Study Material
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अंलुच्छेद रे टार्ज /, ड्छेद्-लें<२2, (#?७॥730793[911 ४४०ांपंम 6), अनुच्छेद -लेखन का अर्थ है किसी दिए गए विषय पर लगभग सौ से एक सौ पच्चीस शब्दों में एक अनुच्छेद लिखना।, अनुच्छेद किसी निबंध का सार न होकर अपने-आप में पूर्ण होता है। इसमें भूमिका लिखने की आवश्यकता नहीं होती ।, और न ही निष्कर्ष लिखना होता है। अनुच्छेद लिखते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए, , 1... दिए गए विषय पर ही पूरा अनुच्छेद केंद्रित होना चाहिए।, , 2. इसमे अनावश्यक बातें या प्रसंग नहीं लिखने चाहिए। !, 3. अनुच्छेद के वाक्य एक-दूसरे से जुडे हुए होने चाहिए। द, 4. इसमें लंबे उदाहरणों , आलंकारिक शब्दों इत्यादि का प्रयोग नहीं होना चाहिए।, , 5. यदि शब्द-सीमा दी गई हो तो उसका ध्यान रखना चाहिए।, 6. भाषा में सरलता एवं प्रवाह होना चाहिए।, , , , नीचे अभ्यास के लिए कुछ अनुच्छेद दिए गए हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए।, 1. परिश्रम का महत्त्व, , मानव जीवन में परिश्रम का बहुत महत्त्व है। यह सभी प्रकार की उपलब्धि अथवा सफलता का आधार है।, परिश्रमी मनुष्यों ने मानव-जाति के उत्थान में अतीव योगदान दिया है। हमारी वैज्ञानिक उन्नति के पीछे परिश्रम का बहुत, बड़ा योगदान रहा है। अपने परिश्रम के सहारे मानव सुदूर अंतरिक्ष में जा चुका पहुँचा है। अत: परिश्रम से बचने की, कोशिश नहीं करनी चाहिए। जिस राष्ट्र के नागरिक परिश्रम को महत्त्व नहीं देते, वह राष्ट्र दुनिया के अन्य राष्ट्रों से, पिछड जाता है। यही कारण है कि हमारे महापुरुषों ने लोगों को परिश्रम करते रहने की सलाह दी है। परिश्रम करने वाला, व्यक्ति एक-न-एक दिन अवश्य सफल होता है। कोई भी कार्य परिश्रम करने से ही पूरा होता हैं। केवल इच्छा करने से, नहीं। अतएव किसी ध्येय की प्राप्ति क लिए परिश्रम करना अत्यावश्यक हैं।, , 2. विद्यार्थी जीवन, , बिदयार्थी जीवन किसी भी व्यक्ति के जीवन का वह स्वर्णिम काल है जिस पर उसका समस्त जीवन निर्भर करता, $। जीवन में सफलता की नींव इसी कालाबधि में पड़ जाती है। यदि विद्यार्थी लगन और धेर्य से विद्या प्राप्ति में सलग्न, होता है तो वह अपने जीवन में अबश्य सफल होता है। वह ज्ञान अर्जित कर राष्ट्र के विकास में अपना यागदान दता ह।, बिदया उसे चर्त्रिवान एबं सदाचारी बनाती है। परंतु कुछ बिदयार्थी इस जीवन का महत्त्व नहों समझत; व आलस्य एव, व्यर्थ के क्रियाकलापों में अपना अमृुल्य समय नष्ट कर देते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को भविष्य म॑ पछताना पड़ता हैं। उन्हे, अपने जीवन में विद्या, धन और यश से वंचित रहना पडता है। अत: बिद्यार्थी जीबन का पूरा सदुपयोग करना चाहिए, क्योंकि बिद्याबिहीन मनुष्य पशुतुल्य ही होता है। जिसके पास किसौ-न किसी प्रकार की विद्या होती है, समाज उसी, की सराहना काता है। जिसके पास बिद्या नहीं होती , समाज में उसे तिरस्कार ही मिलता है।, , जा हि व्याकरण पराग-8