Notes of 9th, Hindi 20211216_112515.jpg - Study Material
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अपनी-अपनी ढपली राग मत होना) - इस सभा में, कोई भी हो सकता। सबकी ढपली राग है।, व्यक्ति जो कुछ है, उसके मित्र कर ले जाते हैं। तो, हमेशा अपनी कुटिया खाली जाती है। पूछने पर देती है- की गैया।, गांव में किशोरी लाल ही थोड़ा-सा पढ़ा लिखा व्यक्ति है। करते हैं।, মाकरण, 135, से जिसमें एक पूरा भाव-छिपा रहता है। इसको किसी कथन पर घटाया जाता है जबंकि, घाक्य, মहावरे के प्रयोग वाक्य के बीच ही होता है।, अक्ल बड़ी या भैंस (शरीर बड़ा होने की अपेक्षा बुद्धि बड़ी होनी अच्छी है) -गणेश के, যारीर से घबराने की ज़रूरत नहीं। वाद-विवाद में बुद्धि की आवश्यकता है न कि शरीर, को। अक्ल बड़ी या भेंस वाली कहावत आप जानते ही हैं।, अटका बनिया देय उधार (काबू आने पर ही लोग काम करते हैं) - मैंने जब उसको, मोइकिल देने से इन्कार कर दिया तो उसने झट से मेरे पचास रुपये दे दिए। ठीक भी हैं अनत, ET, skall A), बनिया देय उधार।, अति परिचय ते होत है अरुचि अनादर भाय (बहुत परिचय रोचकता तथा मान में डि, पहुंचाता है) -वे महात्मा जो वर्ष में एक बार आते थे तो उनका बहुत मान होता था। अत, उन्होंने एक मास में दो-दो चक्कर लगाने प्रारम्भ कर दिए हैं। अत: उनका विशेष मान नहीं, होता। इसी को कहते हैं अति परिचय ते होत है अरुचि अनादर भाय ।, अधजल गगरी छलकत जाए (कम ज्ञान अथवा थोड़े धन वाला व्यक्ति दिखावा अधिक, करता है )-महेश ने केवल आठवीं कक्षा पास की हुई है, लेकिन बातें ऐसी करेगा जैसे, बी० ए० पास्र हो । इसी को कहते हैं अधजल गगरी छलकत जाए।, अन्त भले का भला (अच्छे को अन्त में अच्छा फल मिलता है) -मैं तो सच्चाई और, ईमानदारी का पथिक हूं। मेरा 'अन्त भले को भला' में, अन्धा क्या चाहे दो आंखें (मनचाही वस्तु प्राप्त होने पर और क्या चाहिए)-जब मैंने, उसे चल-चित्र देखने के लिए चलने को कहा तो वह प्रसन्नता से झूम उठा और कहने लगा-, अन्धा क्या चाहे दो आंखें ।, अन्धा क्या जाने बसंत की बहार (असमर्थ व्यक्ति गुणों को नहीं पहचान सकता ) -, उसे मूर्ख को गीता का उपदेश देना व्यर्थ है। उस पर तो ' अन्धा क्या जाने बसंत बहार' वाली, कहावत चरितार्थ होती है ।, अन्धा बांटे रेवडियां फिर-फिर अपनों को देय (पक्षपाती व्यक्ति बार-बार अपनों को, हो लाभ पहुंचाता है) -मन्त्री महोदय अपने रिश्तेदारों को ही लाभ पहुंचा रहे हैं। इसी को, कहते हैं अन्धा बांटे रेवडियां फिर-फिर अपने को देय।, अन्धी पीसे कुत्ता चाटे (नासमझ अथवा सीधे-सादे व्यक्ति के परिश्रम का लाभ दूसरे, |, विश्वास है।, अन्धी पीसे, कुत्ता, चाटे वाली बात हो रही है।, अन्या पे काना राजा (मुर्खों में थोडे ज्ञान वाला भी बड़ा मान लिया जाता है)--हमारे, अन्ध की गैया राम रखवैया (असहाय का भगवान, रक्षक होता है)-वह बुढ़िया, राम रखवैया।, अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग (भिन्न-भिन्न मत होना) -इस सभा में