Notes of Class-7th A, Hindi Literature भारतीय कृषक - Study Material
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1 इसा।, वंधी कविताएँ भी लिखो हैं।, चतुर्वेदी जी कविता में शिल्प की तुलना में भाव को अधि, ने कविताएँ भी लिय, हैं। उन्होंने परंपरागत छंदबद्धता रचना के अनुकूल शब्दों का भी प्रयाग, किया है।, लन के दौरान कई बार जेल /, उत्तराखण्ड राज्य, APRIL, 19, क्षितिज भाग-1 उत्तराखण्ड मुद्रण वर्ष 2019 20-, 2. भारतीय कृषक, हमारा देश ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाला देश है और कृषि इसकी रीढ़ है। देश की एक बड़ी आबादी आज भी आय, रोजी-रोटी कृषि से ही प्राप्त करती है। इसलिए किसानों की यहाँ बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। परंतु देश के लिए गयह, अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि आज़ादी के छह दशक बाद भी भारतीय कृषकों की दरशा में अधिक अंतर नहीं आया है।, एड्स निम्नलिखित कारणों से, किसी स्त्री या पुरुष द्वारा एच, पै, दूषित सुई के प्रयोग से।, 2., स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय कृषकों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उस समय देश में अंग्रेज़ों का पूरी तरह नियंत्रण, था। अंग्रेज़ों का तो मूल उद्देश्य व्यापार या शासन के द्वारा भारतीयों का पूर्ण शोषण करना ही था, अत: उन्होंने किसानों, 4., की हालत में सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किया। कृषकों की स्थिति सुधारने के लिए अंग्रेज़ों ने कई बार कानून पारित, किये, परंतु वास्तविक रूप में उनका कभी भी पूरी तरह पालन नहीं किया। किसानों को अपने उत्पाद का एक बड़ा भाग, दूषित रक्त संचरण से।, एच.आई.वी. संक्रमित महिल, 12, कर के रूप में सरकार को देना पडता था। सूखा तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय, हो जाती थी। कर अदायगी के लिए वे सेठ-साहूकारों से कर्ज़ लेकर उसका बोझ जीवनभर ढोते रहते थे। उन्हें व उनकी, उपरोक्त दिए गए कारणों के, हैं, उनके अंदर धीरे-धीरे रोग प्रति, है। एड्स से ग्रसित लोग हमारी, करना चाहिए।, संतानों को बंधुआ मज़दूरी करनी पड़ती थी।, स्वतंत्रता के बाद कृषकों की दशा में सुधार के लिए अनेकों योजनाएँ कार्यान्वित की गई। समय-समय पर विभिन, सरकारों द्वारा किसानों को अनेक सुविधाएँ दी गईं मगर अनेक कारणों से इन सुविधाओं का लाभ पूर्ण रूप से उन तक, नहीं पहुँच पाया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों में भारी असंतोष है क्योंकि उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में न, तो बिजली मिल पाती है और न ही उन्नत किस्म के बीज आदि समय पर उपलब्ध होते हैं।, भारत में भी यह रोग अप, बरतें तथा इसके प्रति सभी को, समाचार-पत्रों तथा अन्य संचा, बारे में सही जानकारी प्राप्त क, जीवन परिचय-देश-प्रेम की गौरव-गाथा के अमर, ज़िले के बाबई गाँव में हुआ था। प्राथमिक शिक्षा के, किया। किशोरावस्था में ही उन्होंने अध्यापन कार्य शु, देहांत सन 1968 में, भारतीय कृषक की सामान्य दशा का यदि अवलोकन करें तो हम पाते हैं कि हमारे कृषक निरक्षर हैं। यह कृषका, के पिछड़ेपन का एक प्रमुख कारण है। निर्धनता एवं अशिक्षा के कारण वे सरकार की कृषि संबंधी विभिन्न याजनाओं की, लाभ नहीं उठा पाते हैं। शिक्षा के अभाव में वे उन्नत बीज, कृषि के आधुनिक उपकरणों तथा उच्च वैज्ञानिक तराका से, वंचित रह जाते हैं।, का उत्तर प्राप्त कर सकते हैं, मुख्य रूप से महानगरीय संस, प्रयासों की आवश्यकता है।, हुआ, रचना परिचय-माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाएँ, काव्य रचनाएँ- हिम किरीटनी, हिम तरंगिनी, म, अन्य रचनाएँ- इन्होंने निबंध, नाटक, कहानी, साहित्यिक विशेषताएँ-माखनलाल चतुर्वेदी की, बलिदान की भावना मिलती है। कवि होने के साथ, कविताएँ भी लिखी हैं।, भाषा-शैली-चतुर्वेदी जी की कविता में खड़ी, शब्दों का प्रयोग किया गया है। उन्होंने मुक्त, लिए तथा इस रोग से बचाव, पिछले कुछ वर्षों में विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में भारत ने विशेष प्रगति की है। संचार माध्यमों के विशेष प्रचार, एवं प्रसार का सकारात्मक प्रभाव हमारी कृषि पर भी पड़ा है। दूरदर्शन तथा रेडियो आदि के माध्यम से हमारी सरकार एव, अन्य संस्थाएँ कृषकों को कृषि संबंधी जानकारियाँ दे रही हैं तथा उन्हें उन्नत बीजों व विभिन्न वैज्ञानिक तरीका से अवा, करा रही हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों आदि के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा इ, जिससे वे आधुनिक उपकरण तथा सिंचाई आदि का प्रबंध कर सकें।, आशा है कि शीघ्र ह, सकेगा। हाल ही में भारत, काफ़ी कम हो सकती है।, छंद, है, अनुसंधान की जरूरत है