Notes of Class 6th, Hindi/Sanskrit IMG_20220127_104651.jpg - Study Material
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2090) | । संजीव पाया, 4२ के निराकरण के उपाय-इस समस्या के समाधान के लिए प्रथम तो वर्तमनीशिक्षा ;, , 5 आन्तिकारी परिवर्तन व सुधारों की आवश्यकता है। शिक्षा इस प्रकार की हो कि विद्यार्थियों मौआऑत्मनिर्भरता «, , उद्भावनाओं का विकास हो; छात्रों एवं शिक्षकों के बीच सहदय एव बनिष्ट सम्बन्ध हों । समाज कॉम यह कर्त्तय, , कि विद्यार्थियों के सम उच्च आदश प्रस्तुत करी इस प्रकार इस समस्या का समावान ततगा से हो सकता हे, , 5. छोत्र जीवन को सफलता का रहस्य-आज का विद्यार्थी भावी ज्ञागरिक हे। देश क, विकास में, उसकी उन्नति में वह एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। अतएव विद्यार्थी कौपते अलावा समाज, देश व विश्व के कल्याणार्थ अनुशासनप्रिय बनना चाहिए। अनशासनप्रिय छात्र ही परिश्रमी जी कर्त्तव्यपरायण और, विनयशील हो सकता है तथा प्रगति के चमकते हुए मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।, , 6. उपसंहार-अनुशासन एक ऐसी प्रवृत्ति या संस्कार है, जिसे अपनाकर विद्यार्थी अपना जीवन सफल बना सकता, है। अनुशासनप्रिय होने से विद्यार्थी में अनेक श्रेष्ठ गुणों का स्वत: विकास होता है । इससौ बह अपने तथा समाज की, प्रगति में सहायंक होता है। अतः विद्यार्थी को अनुशासनप्रिय होना चाहिए।, , 0 44. बेरोजगारी की समस्या, हर! अथवा, बेरोजगारी की समस्या : कारण और निराकरण के उपाय, , संकेत बिन्दु-1. प्रस्तावना 2: बेरोजगारी : एक जटिल समस्या 3. बेरोजगारी के कारण 4. समस्या के |, समाधान के उपाय 5. उपसंहार। । । |, , 4. प्रस्तावना-वर्षों तक पराधीतता का कष्ट झेलकर जब भारत को स्वतन्त्रता प्राप्त हुई, तो तब अनेक समस्या, सामने आयीं । प्रारम्भ में शरणार्थी समस्या, औद्योगिक विकास की समस्या और रियासतों के एकीकरण की समस्या प्रधान, थी। लेकिन अप्रत्याशित जनसंख्या वृद्धि होने से बेरोजगारी की समस्या इतनी व्यापक रूप से उभरी कि इसका समाधान, अभी पे नहीं हो पाया है। वर्तमान में नगरों में शिक्षितों तथा ग्रामों में अशिक्षितों की बेकारी का भयंकर रूप देखा जा, सकता है। ँ *, , 2. बेरोजगारी : एक जटिल समस्या-बेरोजगारी की समस्या व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को भयंकर रूप से प्रभावित, कर रही है। देश के नवयुवक निराश होते जा रहे हैं। सामाजिक जीवन में रहने सहन के स्तर में गिरावट होती जा रही, है, भ्रष्यचार बढ़ता जा रहा है, रिश्वतखोरी और दुराचार को प्रोत्साहन मिलो रहा है, बेरोजगारी से युवा बर्ग में भयंकर, असन्तोष पनप रहा है, जिससे देश में आन्दोलन की प्रवृत्तियों, अशान्ति और अराजकता का प्रसार होता जा रहा है।, , 3. बेरोजगारी के कारण-इस समस्या के समाधान के लिए इसके कारणों और निराकरण के उपायोपर विचार, करना सार्थक सिद्ध हो सकता है। इस समस्या के मुख्यतया ये कारण हैं. जनसंख्या में अप्रत्याशित वृद्धि गलत आज!, नीति, रोजगारोन्मुख शिक्षा का अभाव आदि। इसके अलावा लघु-कुटीर उद्योगों का हास तथा मशीनीकरण का अत्यधिक, प्रसार भी बेरोजगारी का एक प्रमुख कारण है। तह, , 4. समस्या के समाधान के उपाय-बेरोजगारी की इस भयानक समस्या के समाधान हेतु उक्त कारणों की, निवारण करना जरूरी है।इस दिशा में हमारा सर्वप्रथम कार्य बढ़ती हुई जनसंख्या को नियखिताक जाओ रोकना होगा।, , परिवार नियोजन और विवाह की आयु सीमा में वृद्धि कर हम इस समस्या का कुछ निराकरण करने में सफल हो सकते, हैं। लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास करना होगा। कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी प्रयत्न करना होगा, मशीनीकरण के विकास को तीव्र गति से प्रसारित करना होगा। शिक्षा प्रणाली में भी क्रान्तिकारी परिवर्तनों के द्वार, व्यवसायोन्मुखी बनाकर स्वावलम्बन तथा स्वरोजगार का, प्रसार करना जरूरी है। देश में ऐसे आर्थिक कार्यक्रम लाई, किये जायें, जिनमें अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध हो सके । | किये |, 5, उपसंहार-इस प्रकार इस समस्या के समाधान के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी सभी स्तरों पर का, जाने की आवश्यकता है। इस समस्या-के समाधान के लिए जनता का सहयोग सबसे अधिक वांछनीय हे । इसे राष्ट आओ, समस्या मानकर दृढ़ संकल्प से सभी बेरोजगारी मिटाने में जुट जाएँ, तो कोई शक्ति इसमें बाधक नहीं ₹ कर्ती |, 45, समाचार-पत्र, अथवा, ३ समाचार-पत्रों का महंत्त्व पत्रों से जो, पकैत बिन्दु-1. प्रस्तावना 2, समाचार पत्रों का इतिहास एवं विकास 3. समाचाए |, 4, समाचार-पत्रों से हानियाँ 5. उपसंहार। ।