Notes of X A 2021-22, हिन्दी सपनों के से दिन - Study Material
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सपनों के से दिन, , 1) पी टी साहब की 'शाबाश' फ़ौज़ के तमगों सी क्यों लगती थी? स्पष्ट कीजिए।, , उ- पी टी साहब बहुत सख्त स्वभाव और अनुशासन में रहनेवाले व्यक्ति थे। वे छोटी-सी गलती पर बच्चों को, बहुत बुरी तरह मारते थे। बच्चों ने उन्हें कभी हस्ते या मुस्कुराते नहीं देखा था। बच्चे उनसे बहुत डरते थे। पी टी, साहब जब बच्चों को स्काऊटिंग की परेड़ का अभ्यास करवाते उस समय यदि कोई गलती नहीं होती तो वे बच्चों, को शाबाश कहते थे। बच्चों के लिए वह शाबाश फ़ोज़ के तमगे जैसी लगती थी। बच्चों को लगता था कि उन्होंने, बहुत ही महत्वपूर्ण कर्तव्य अच्छी ढ़ंग से की है, जिससे पी टी मास्टर से शाबाश रूपी तमगे मिला है।, , 2) हेड़ मास्टर शर्माजी ने पी टी साहब को मुअत्तल क्यों कर दिया?, उ- पी टी साहब चौथी कक्षा के छात्रों को फ़ारसी पढ़ाते थे। बच्चों के लिए फ़ारसी भाषा अंग्रेज़ी से भी कठिन, थी। पी टी साहब ने छात्रों को एक शब्द रूप याद करके दूसरे दिन सुनाने के लिए कहा था। शब्द रूप कठिन थी, बच्चे मार के डर से शब्द रूप याद करते रहे। परंतु शब्द रूप याद नहीं हुआ। अगले दिन पी टी मास्टर ने शब्द, रूप सुनाने के लिए कहा,कोई भी छात्र नहीं सुनाए। पी टी साहब ने बच्चों को टाँगों के बीच से बाहें निकालकर, कान पकड़ने (मुरगा बनाना) की सजा दी कमज़ोर बच्चे तीन-चार मिनट में ही थकने लगे।, , हेड़मास्टर शर्माजी ने जब यह दृश्य देखा तो उनसे सहा नहीं गया। उन्होंने पी टी साहब को बच्चों के साथ बुरा, व्यवहार करने पर मुअत्तल कर दिया।, , 3) पी टी साहब (प्रीतमचंद) की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।, , उ- व्यक्तित्व - मास्टर प्रीतमचंद देखने में दुबले-पतले थे, व ख उनका शरीर गठीला था। उनकी आँखें बाज़ जैसी, , तेज़ थी। वे खाकी वर्दी पहनते थे। बूटों की एड़ियों के नीचे कीलें लगी हुई थीं। उनका पूरा व्यक्तित्व बच्चों को, , भयभीत करनेवाला था।, , अनुशासन प्रिय अध्यापक - मास्टर प्रीतमचंद् रु शासन में रहना पसंद करते थे। ले प्रार्थना के समय सभी, , लड़के कतारों में कद के बी तर [सार सीधे खड़े होते थे। यदि कोई लड़का हिलता हुआ देता तो मास्टर, , प्रीतमचंद उस लड़के को बुरी तरह से मारने लगते थे।, , कठोर स्वभाव- मास्टर प्रीतमचंद में मानवीय भावनाएँ बिलकुल नहीं थी। उनका स्वभाव बहुत, , कठोर था। बच्चों ने उन्हें हँसने या मुस्कुराते हुए नहीं देखा था।, , भावना रहित - पी टी सर छोटी-सी गलती पर बड़ी से बड़ी सजा देते थे। एक बार पी टी सर ने चौथी कक्षा के, , बच्चों को मुर्गा बना दिया था। कमज़ोर व छोटे बच्चे तीन-चार मिनट में ही थकान और जलन के कारण गिर, , ड्ति थे। परंतु मास्टरजी पर इसका कोई प्रभाव नहीं था। इसी कारण हेड़मास्टर शर्माजी ने उन्हें मुअत्तल कर, यया।, , पक्षी प्रेम - मास्टर प्रीतमचंद को छोटे बच्चों के साथ कोई दया न थी। परंतु उन्हें पक्षियों से प्रेम था। उन्होंने दो, , तोते पाल रखे थे। उन तोतों को बादाम खिलाते थे। जो मास्टर फूल में बच्चों को मारते हैं, वे कैसे पक्षियों के, , साथ ष्यायाहार कर सकते हैं ? यह सोचकर बच्चे आश्चर्य में पड़ जाते थे। मास्टरजी को अपनी गलती पर, , पछतावा नहीं था।, , (4) विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान, समय में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपना विचार प्रकट कीजिए।, उलेबक के अनुसार विद्यार्थी जीवन में बहुत कठोर और अमानवीय व्यवहार किया जाता था। विद्यार्थियों के, मन में की मार का इतना डर था कि उन्हें नई कक्षा में जाने की खुशी भी न थी। उन्हें स्कूल जेल के, समान लगती थीं। अधिक बच्चे स्कूल जाने के बजाय काम करने को तैयार थे।, , वर्तमान समय में अध्यापक बच्चों को कठोर दंड नहीं दे सकते। अगर देते तो उनपर कानूनी कार्यवाही दी जा, सकती है । पढ़ाई में कमज़ोर बच्चों के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए , इस विषय के बारे में अध्यापकों को, प्रशिक्षण के समय सिखाया जाता है। यदि कोई उद्धंड बच्चा हो तो उसे प्यार से समझाया जाता है, फ़िर उसे, बालमनोचिकित्सक के पास परामर्श करने का सुझाव दिया जाता है। बच्चों के गान मे स्कूल में स्कूल के प्रति भय, निकालने के लिए स्कूल के वातावरण को खुशहाल बनाया जा सकता है, जिससे का शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास हो सके।, , , , , , 5) लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया, करता था और उसे दूर न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति बहादुर बनने की कल्पना किया करता था?, उ-लेखक के छात्र में अप्रैल से स्कूल आरंभ होते थे। डेढ़ महीना स्कूल के बाद उन्हें डेढ़-दो महीनों की, छुट्टियों होती थी। पहले एक महीने वे खेलकूद में व्यतीत करते थे या अपनी माँ के साथ ननिहाल जाते थे, वहाँ, खूब तालाब में नहाते और पास के टीले की रेत में खेलते थे। जब छुट्टियों की शेष एक महीना बचना तो स्कूल से, मिले गृह कार्य की याद आने लगती थी। हिसाबवाले मास्टर दो सौ से कम सवाल नहीं देते थे। वे लोग दस सवाल, हर रोज़ करने की योजना बनाते। फिर वे लोग पंद्रह सवाल हर रोज़ करने की योजना बनाते।, , लेखक के साथियों को गृह कार्य करने की उपेक्षा मास्टर की मार ही बेहतर समझते थे। लेखक भी, , , , बहादूर बनकर मार खाने के लिए तैयार हो जाता था।, , 6 सपनों के से दिन कहानी के आधार पर लिखिए कि उन दिनों माँ-बाप बच्चों को स्कूल भेजने में रुचि क्यों नहीं, ?, , उ- लेखक स्कूली दिनों के समय लोग पढ़ाई-लिखाई के प्रति जागरूक नहीं थे और बच्चों को पढ़ाना भी नहीं, चाहते थे। पास पैसे की कमी नहीं थी वे अपने बच्चों को पाठशाला भेजना आवश्यक नहीं समझते थे।, गरीब लोग अपने बच्चों को पर्चूनिए,आढ़तिए दुकानों में खाता लिखाना ही उनके लिए पर्याप्त शिक्षा मानते थे।, , कफ