Notes of IX A (2022-23), हिन्दी & हिन्दी अनौपचारिक-पत्र.pdf - Study Material
Page 3 :
७. 0०ा -+> (७० दो, , - बधाई पत्र, , शुभकामना पत्र, , - निमंत्रण पत्र, , - विशेष अवसरों पर लिखे गये पत्र, - सांत्वना पत्र, , - किसी प्रकार की जानकारी देने, , के लिए, , - कोई सलाह आदि देने के लिए
Page 4 :
<* भाषा सरल व स्पष्ट होनी चाहिए।, <»पत्र लेखक तथा प्रापक की आयु, योग्यता, पद आदि का ध्यान रखा, जाना चाहिए।, , अनौपचारिक-पत्र <*पत्र में लिखी बात संक्षिप्त होनी चाहिए।, , <* पत्र का आरंभ व अंत प्रभावशाली होना चाहिए।, , लिखते समय <* भाषा और वर्तनी-शुद्ध तथा लेख-स्वच्छ होना चाहिए।, ध्यान रखने योग्य **पत्र प्रेषक व प्रायक वाले का पता साफ व स्पष्ट लिखा होना चाहिए।, बातें <*कक्षा/परीक्षा भवन से पत्र लिखते समय अपने नाम के स्थान पर, बातें न क० ख० ग० तथा पते के स्थान पर कक्षा/परीक्षा भवन लिखना, * चाहिए।, *<* अपना पता और दिनांक लिखने के बाद एक पंक्ति छोड़कर आगे, , लिखना चाहिए।, <*पत्र में काट छांट नही होनी चाहिए।
Page 5 :
<» पता- सबसे ऊपर बाईं ओर प्रेषक (पत्र भेजने वाले) का नाम व पता लिखा, जाता है।, , *<* दिनांक- जिस दिन पत्र लिखा जा रहा है, उस दिन की तारीख।, , <» विषय- (सिर्फ औपचारिक पत्रों में, अनौपचारिक पत्रों में विषय का प्रयोग नहीं, किया जाता है |, , <* संबोधन- प्रापक (जिस व्यक्ति को पत्र लिखा जा रहा है) के साथ संबंध के, अनुसार संबोधन का प्रयोग किया जाता है। (जैसे कि बड़ों के लिए पूजनीय,, पूज्य, आदरणीय आदि के शब्दों का प्रयोग किया जाता है और छोटों के लिए प्रिय,, प्रियवर, स्नेही आदि का प्रयोग किया जाता है।), , <० अभिवादन- जिस को पत्र लिखा जा रहा है उसके साथ संबंध के अनुसार, जैसे कि सादर, , प्रणाम, चरण स्पर्श, नमस्ते, नमस्कार, मधुर प्यार आदि |, , <* मुख्य विषय- मुख्य विषय को मुख्यतः तीन अनुच्छेदों में विभाजित करना चाहिए।, , <० पहले अनुछेद की शुरुआत कुछ इस प्रकार होनी चाहिए- "हम/मैं यहाँ कुशल हूँ, आशा, करता हूँ कि आप भी वहाँ कुशल होंगे।“, , <» दूसरे अनुच्छेद में जिस कारण पत्र लिखा गया है उस बात का उल्लेख किया जाता है।, , <* तीसरे अनुछेद में समाप्ति से पहले, कुछ वाक्य अपने परिवार व सबंधियों के कुशलता के, लिए लिखने चाहिए। जैसे कि- "मेरी तरफ से बड़ों को प्रणाम, छोटों को आशीर्वाद व, प्यार आदि"।, , 4» समाप्ति- अंत में प्रेषक का सम्बन्ध जैसे- आपका पुत्र, आपकी पुत्री, आपकी की भतीजी, आदि"।