Notes of Class 12th, Hindi Screenshot_20211001-102224.png - Study Material
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003 | बट कै 2८, , बाज़ार दर्शन, , , , _ बड | 0255 2 हिंदी कोर, फट्डारा' 50005, आरोह पाठ-व2 जैनेंद्र कुमार, , 4. बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है?, , उत्तर:- बाज़ार का जादू चढ़ने पर मनुष्य बाज़ार की आकर्षक वस्तुओं के मोह जाल में फैंस जाता है। बाजार के इसी आकर्षण के, कारण ग्राहक सजी-धजी चीजों को आवश्यकता न होने पर भी खरीदने के लिए लालायित हो जाता है। इसी मोहजाल में फँसकर वह, ऐसी गैरजरूरी वस्तुएँ खरीद लेता है जो कुछ समय बाद घर के किसी कोने की शोभा बढ़ाती है, परन्तु जब यह जादू उतरता है तो, उसे एहसास होता है कि जो वस्तुएँ उसने आराम के लिए खरीदी थीं उल्टा वे तो उसके आराम में खलल डाल रही है।, , 2. बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व का कौन-सा सशक्त पहलू उभरकर आता है? क्या आपकी नज़र में उनका आचरण समाज में, शांति-स्थापित करने में मददगार हो सकता है?, , उत्तर:- बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व का यह सशक्त पहलू उभरकर सामने आता है कि उन्हें अपनी आवश्यकताओं का भली-भाँति, ज्ञान हैंववे उतना ही कमाना चाहते हैं जितनी की उन्हें आवश्यकता है।।, , बाज़ार उन्हें कभी भी आकर्षित नहीं कर पाता वे केवल अपनी जरुरत के सामान के लिए बाज़ार का उपयोग करते हैंवे खुली, आँखें,संतुष्ट मन और मग्न भाव से बाजार जाते हैं।, , भगतजी जैसे व्यक्ति समाज में शांति और व्यवस्था लाते हैं क्योंकि इस प्रकार के व्यक्तियों की दिनचर्या संतुलित होती है और, , ये बाज़ार के आकर्षण में फँसकर अधिक से अधिक वस्तुओं का संग्रह और संचय नहीं करते हैं जिसके फलस्वरूप मनुष्यों में, होड़,अशांति के साथ महँगाई भी नहीं बढ़ती। अत: समाज में भी शांति बनी रहती है।, , 3. 'बाज़ारूपन' से क्या तात्पर्य है? किस प्रकार के व्यक्ति बाज़ार को सार्थकता प्रदान करते हैं अथवा बाज़ार की सार्थकता किसमें, है?, , उत्तर:- बाजारुपन से तात्पर्य ऊपरी चमक-दमक से है। जब सामान बेचने वाले बेकार की चीजों को आकर्षक बनाकर मनचाहे दामों, में बेचने लगते हैं, तब बाज़ार में बाजारुपन आ जाता है,इसके अलावा धन को दिखावे की वस्तु मान कर व्यर्थ में उसका दिखावा, करने वाले ग्राहक भी बाजार में बाजारूपन लाने में सहायक होते हैं।, , जो विक्रेता, ग्राहकों का शोषण नहीं करते और छल-कपट से ग्राहकों को लुभाने का प्रयास नहीं करते साथ ही जो ग्राहक अपनी, आवश्यकताओं की चीजें खरीदते हैं वे बाजार को सार्थकता प्रदान करते हैं। इस प्रकार विक्रेता और ग्राहक दोनों ही बाज़ार को, सार्थकता प्रदान करते हैं।, , मनुष्य की आवश्यकताओं की ज्यादा से ज्यादा पूर्ति करने में ही बाजार की सार्थकता है।, , 4. बाज़ार किसी का लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र नहीं देखता वह देखता है सिर्फ़ उसकी क्रय शक्ति को। इस रूप में वह एक प्रकार से, सामाजिक समता की भी रचना कर रहा है। आप इससे कहाँ तक सहमत हैं?