Notes of +12 ARTS, Hindi IMG_20220122_114549.jpg - Study Material
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28 8 ६801 207 5: किलर, , (>०यका(०क७8+ रह ०७+क व, , , , , , , ४७ प्रश्न 1. लेखक ने पूरे पाठ में जाति-प्रथा की लिन क > वन जाति-प्रथा की किन बुराइयों, उत्तर-लेखक नें जाति- प्रथा में निम्न बुराइयाँ की हैः किन बुराइयों का वर्णन किया है ? [175.], * जाति-प्रथा ने जो श्रम-विभाजन किया है, जाम अमिको / वह सवा नहीं है, 1 मी में भेद पैदा ऋरती है। कह, * का में पा] के कारण ऊँच-नीच का भेद पैदा हो गया है।, * जाति-प्रथा पर आधारित श्रम-विभाजन श्रमिक की रुचि पर आधारित नहीं है।, * श्रम-विभाजन माता-पिता के आधार पर गर्भ में ही तय करना जाति-प्रथा की देन है। इस विभाजन में, 5 की रुचि व क्षमता का ध्यान नहीं रखा जाता।, 1.1] आतपित की सदैव के लिए एक व्यवसाय से बाँ। |, ता) ध देती है। भले ही वह पेशा अनुपयुक्त एवं, ० पा विपरीत परिस्थितियों में व्यवसाय बदलने की अनुमति नहीं देती। अतः व्यक्ति को भूखा मरना, पड़ता है।, ० जाति-प्रथा के कारण विवशता में किए गए कार्यों में व्यक्ति रुचि नहीं लेता।, * जाति-प्रथा के कारण कुछ कार्य त्याज्य व घृणित माने जाते हैं। अत; लाचारी में इन कार्यों को करने वाले, व्यक्ति कर्म के प्रति लापरवाही बरतते है।, /# प्रश्न 2, मनुष्य की क्षमता किन बातों पर निर्भः है 2 इनके विषय में लेखक का कया मत है ? [775.], अथवा, डॉ. आंबेडकर की कल्पना के आदर्श समाज के तीन बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।, [4.1. 0887४ 2015, 2076], उत्तर-लेखक लिखता है-मनुष्यों की क्षमता तीन बातों पर निर्भर रहती है1, शारीरिक वंश-परंपरा, 2. सामाजिक उत्तराधिकार, 8. मनुष्य के अपने प्रयत्न, लेखक का मत है कि मनुष्य के अपने प्रयत्न उसके अपने वश में हैं।, असमान व्यवहार करना अनुचित नहीं कहा जा सकता। परंतु यहाँ भी ध्यान, , के समान अवसर उपलब्ध होने चाहिए।, उत्तराधिकार दोनों मनुष्यों के वश में नहीं हैं। ये जन्मजात होते हैं। अत: इनके, , शारीरिक वंश-परंपरा और सामाजिक, आधार पर किसी का वर्ग और कार्य निश्चित नहीं होना चाहिए। न ही जन्म के आधार पर किसी को उत्तम या हीन मानना, , चाहिए।, , इसलिए उनके आधार पर किसी मनुष्य के साथ, रखना चाहिए कि सभी मनुष्यों को प्रयत्न करने, , प्रश्न 3. जन्मजात धंधों में लगे श्रमिक कार्यकुशल क्यों नहीं बन पाते ? के, उत्तर-जिन लोगों को जाति-प्रथा के कारण जबरदस्ती अपना काम-धंधा अपनाना पड़ता है, वे कार्यकुशल नहीं बन, , ः हि कार्य को रुचिपूर्वक न करके मजबूरी में करते हैं। जबरदस्ती किए जाने के कारण वे दुर्भावना से, हो जा हैं मो को करने की बजाय टालते हैं। उनका काम में दिल-दिमाग नहीं लगता। इसलिए वे अपनी, ८, , ग्रस्त हो जाते, , क्षमता से बहुत कम काम निकाल पाते हैं। $ आई कहे, प्रश्न 4, डॉ, आंबेडकर किस आधार पर असमान व्यवहार को उचित मानते हैं और क्यों ?, , कोई का को उचित हैं। उनका आशय है कि यदि, , आंबेडकर असमान प्रयत्न के आधार पर असमान व्यवहार को उचित मानते हैं। उनका आशय, , उत्तर डॉ, आंबेडकर असमा 1 ह, , ई व्यक्ति अपनी इच्छा से कम प्रयत्न करता है तो उसे कम सम्मान मिलना चाहिए। अधिक प्रयत्न करने पर मा साया, मिलना ओं, , तना चाहिए। इस दल का प्रोत्साहन या दंड उचित है। इससे मनुष्य को अपनी क्षमताओं का विकास करने का अवसर, , मिलता है।