Notes of 12Th, Hindi IMG_20220113_083809.jpg - Study Material
Page 1 :
कृतिघाह्का पका अरन 4 (अ) क लए, , & | ग्ाठ उ4 | पल्लबन | व |, रे .. जिम्नलिखसित प्रशनों में से किसी एक का उत्तर 100 से 120 शब्दों ' ।, में लिख्विए : (दो में से एक) : ।, (0) “ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होइ ' भाव पल्लवन कीजिए।, , उत्तर : संत कबीरदास जी का बड़ा प्रसिद्ध दोहा है पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोइ।, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होइ।।, , , , 6, श््न, |, , एन ग्राप्त किया जा सकता है। परंतु केवल पुस्तके पढ़कर प्रभु का साक्षात्कार नहीं किया, ग़ सकता। बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़कर भी जो प्रेम करना नहीं सीखा, वह अज्ञानी है।, , प्रेम शब्द केवल ढाई अक्षर का है, जिसने उसे पढ़ लिया, अर्थात जिसने प्रभु से, है, गीवमात्र से प्रेम कर लिया, उसने ईश्वर का साक्षात्कार कर लिया। वास्तव में वही पंडित के, , , , से, , हैं। प्रेम संसार की ज्योति है। जीवन के सुंदरतम रूप की यदि कुछ अभिव्यक्ति, ैती है, तो वह प्रेम ही है।, , जे प्राप्त कर सकता है।, (2) 'लालच का फल बुरा होता है ', उक्ति का विचार पल्लवन कीजिए।, लालच का फल सदैव बुरा होता है। लालच दूसरों का हक मारने की, ः युत्ति है। लालच का अर्थ ही है अपनी आवश्यकता से अधिक पाने का प्रयास करना।, , ६ _ | ३, और जब हम अपनी आवश्यकता से अधिक हासिल करने का ब्रयास करते हैं तो कहीं, , : कहीं किसी का हक मार रहे होते हैं।, जीवन में अनेक अवसरों पर हमारे साथ ऐसा होता है जब हम किसी बात पर लालच, हर बैठ है। और अधिक पाने को लालसा में हम ऐसा कुछ कर बैठते हैं कि हमारे पास, , गो वछ होता है हा उस भा बैठते हैं। लालच ऐसी बुरी चीज है कि उसके फेर में, , इस छोटे-से दोहे में जीवन का ज्ञान है। कबीर जी का कहना है कि पुस्तकें पढ़कर, , । जिस व्यक्ति ने ग्रेम को चखा, उसे कुछ और जानना शेष नहीं रहता, क्योंकि उसने 3, रम ज्ञान को या लिया। प्रेम ही ज्ञान है, प्रेमी ही असली ज्ञानी है। प्राणिमात्र को प्रेम करे, ॥ला व्यक्ति जब दूसरों के कष्ट, दुख ओर पीड़ाएँ देखता है, तो उसके नेत्र छलछला 1, , , , ब्रेम वह रचनात्मक भाव है, जो आत्मा की अनंत शक्तियों को जाग्रत कर उसे, र्णता के लक्ष्य तक पहुँचा देता है। प्रेम की भावना का विकास करके मनुष्य परमात्मा 5, , , , , , , , 2५ मानव कई बार मानवता तक को ताक पर रख देता है, और लालसाओं का एक अटूट सिलसिला चलता रे, बावजूद कुछ और भी प्राप्त करने की लालसा से मनुष्य मे ।, लालच के कारण हमारे सभी रिश्ते-नाते भी बिगड़ जाते हा, अपने परिवार, यार-दोस्तों सभी की नजर में गिर जाते है कल, , यदि जीवन में आगे बढ़ना है, सफल होना डे, , )। मानव, जोवन, हल । रहता है, , तो एजअऊ, 1 ञ्च्छा इन्सान, दूसरों के बारे में सोचना होगा। एक-न-एक दिन लालच का रा बनना हेगा।, , है। अगर समय रहते लालच की प्रवृत्ति को त्याग देंगे तो लालच 3 >..... हो, भी सकते हैं। इसके लिए हमें सदैव लालच करने से बचना थे जात, , >>..., , | चाहेए। ऊगर ६, के जाल में फँस भी गए, तो समय रहते उससे बाहर निकलने का, आह आय, प्रया् ज उक्त:, , | साठ 19 | पर्नेचर लेखन |, , फीचर लेखन, , , , (1) भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर फीचर लेखन कीजिए।, उत्तर :, , , , भारत का अतरिक्ष कार्यक्रम डॉ विक्रम सरामाई की, , , , पाल्पूना रू) उ, एे, , भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है।, , , , , , , , भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के हाथों में है। इसरो की, डॉ. विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में की गई।, , अंतरिक्ष कार्यक्रम से कई बड़े वेज्ञानिक जुड़े रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति, कलाम भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान दे चुके हें!, , 580, , स्थापनों 1969 मे, , , , स्थापना के बाद से ही भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम अच्छी तरह से ऑकैस्ट्रेटड किया, , गया है ओर इसमें- संचार और रिमोट सेंसिंग के लिए, और अनुप्रयोग कार्यक्रम जेसे तीन अलग-अलग तत्त्व थे।, , 1060 और 1970 के दशक के दौरान भारत ने भू राजनोतिक और आर्थिक विचं, के कारण अपना स्वये का लॉन्च बाहन कार्यक्रम प्रारेप किया। देश ने एक साउंडिंग रकिट, रु । ग्राम विकसित किया ओर 1980 के दशक तक सैटेलाइट लॉन्च व्हैकल - 3 और, अधिक उन्नत, संबर्धित सैटेलाइट लॉन्च व्हौकल (ए एस एल वी) की परिचालन उद्ा दे, , बुनियादी ढाँचे के साथ पूरा किया।, सबसे पहले थुंबा को रॉकेट लॉन्चिग सेंटर के तौर पर चुना गया था, , भू चुंबकीय भूमध्य रेखा थुंबा से गुजरती है। भारत ने पहला रॉकेट 21 नवंबर, ., , इसका मुख्यालय बंगलोर में है। घएत दे, , पप्पू णए् इस 5 - >>, >1. र 1. जे [, , उपग्रह, अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली