Notes of Class- 11th, Hindi ग़ज़ल (व्याख्या).pdf - Study Material
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गज़ल, , दुष्यंत कमार, ब्डै, , 1., , कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए,, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए |, , एए1०7१४०॥: इस कविता के माध्यम से कवि ने समाज एवं राजनीति में चलने, वाली हलचल को खत्म कर एक नयी सुबह के बारे में, एक नए तरीके के बारे, , में बताने की कोशिश की है। कवि देश के महान नेताओं पर कटाक्ष करते हुए, कहते हैं कि चुनाव से पहले इन महान नेताओं ने वादा किया था कि वे समाज के, प्रत्येक लोगों को चिराग उपलब्ध करवायेंगे |, , यानी कि कुछ मूलभूत सुख सुविधा उपलब्ध करवायेंगे, मगर यह सोचने की बात है, कि यह कैसे हो सकता है, जबकि इस शहर में ही यह सुख-सुविधाएँ उपलब्ध नहीं, है, तो लोगों को सुविधाएँ कैसे उपलब्ध होगी।, , 2., , यहाँ दरखतों के साय में धूप लगती है,, चलो यहाँ से चल और उम्र भर के लिए ।
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एछःफाग1०४०ा7: दूसरी ओर कवि ने उन संस्थाओं के बारे में बताया है, जो लोगों को, सुख सुविधा उपलब्ध करवाने के नाम पर ही उनका शोषण कर जाते हैं। अर्थात, कहने का तात्पर्य यह है कि यह संस्था एक ऐसा पेड़ है, जहां पर लोग छाया पाने, के लिए जाते हैं, मगर उनको छाया के बज़ाय धूप मित्रती है। अर्थात उनका शोषण, होता है। कवि ऐसे लोगों से बचने के लिए कहते हैं एवं स्वच्छेद जीवन जीने का, संदेश देते हैं।, , है, , नहो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढक लेंगे ।, , ये ल्रोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए।, , फऊरफाग०४ं०ा: यहां पर कभी ने आम जीवन जीने वाले लोगों के विषय में बताया है, कि यह लोग मजबूर लोग हैं। यह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। इनकी गरीबी, इनसे लाख कुछ करवाना चाहें, मगर यह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते क्योंकि, ना ही इनके पास पैसा है और ना ही वह ताकत जिसके जरिए यह अपनी सुखसुविधाओं को पूरा कर सकें।, , यह ऐसे लोग होते हैं जिनके पास अपना शरीर ढकने के लिए कपड़े नहीं होते। ये, अपने पैर से ही अपने पेट को ढक लेते हैं। ऐसे ही गरीब लोगों का फायदा वह लोग, उठाते हैं ,जो शोषण करते हैं क्योंकि अगर इन लोगों का शोषण नहीं होगा, तो राज, में शांति कैसे बनी रहेगी। ऐसे लोगों का शोषण करके ही तो लोगों को वाहवाही, मिलती है, तभी तो इन गरीबों का शोषण होता है।, , 4., , खुदा नहीं, न सही, आदमी का ख्वाब सही,, , कोई हसीन नजारा तो हैं नजर के लिए।, , 951०1०४०॥: दूसरी तरफ कवि कहते हैं कि इन गरीबों के पास एक बेहतरीन शक्ति, होती है, वह शक्ति है कल्पना शक्ति। ये कल्पना के माध्यम से हर चीज को भाप
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लेते हैं। अपने हर सपने को कल्पना के माध्यम से पूरा कर लेते और उन्हें यह, कल्पना ईश्वर भगवान प्रदान करते हैं। जिनको ये बहुत ज्यादा मानते हैं।, , इन लोगों ने ईश्वर को कभी देखा नहीं, परंतु ईश्वर को मन ही मन भाप लेते हैं एवं, ये अपनी कल्पना शक्ति का श्रेय भी ईश्वर को ही देते हैं कि ईश्वर के कारण ही ये, अपनी जिंदगी के कुछ अधूरे सपनों को सपनों के माध्यम से ही देख लेते हैं और, कल्पना में अपने अधूरे सपनों को पूरा भी करते हैं।, , 5., , वे मुतमइ़न हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता,, , मैं बकरार हूँ आवाज में असर के लिए।, , एऊुफाग०४ं०ा: यहां पर कवि ने आम व्यक्तियों के विचारों के विषय में बताया है, कि आम व्यक्ति भ्रष्ट लोगों के विषय में यही सोचते एवं समझते हैं कि भ्रष्ट लोगों, के मन में कोई सोच या उनके पास दिल नहीं होता, तभी तो वह लोगों का शोषण, करते हैं एवं जिंदगी में खुश रहते हैं। फिर कवि कहते हैं कि आम व्यक्ति अगर, विरोध करने पर उतर जाए, क्रांति लाए, तो शायद उनकी जिंदगी बदल सकती है।, , 6., , तेरा निजाम है सिल दे जुबान शायर की,, , ये एहतियात जरूरी हैं इस बहर के लिए |, , एःफ़ा०४०7: कवि फिर कहते हैं कि शायरों एवं शासक में बहुत ताकत होती है,, जो अपनी लेखनी के माध्यम से ऐसे गलत लोगों का विरोध करते हैं। जब शायरी, विरोध पर उतर जाती है, तब सत्ता के लोग इनकी आवाज बंद करने के लिए, इनकी, लेखनी पर ही प्रतिबद्धता लगा देते हैं और अपने चेहरे को लोगों के सामने आने से, रोक देते हैं।, , ही
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जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले,, , मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।, , 971०19४०॥: अंत में कवि कहते हैं कि दुनिया के हर एक व्यक्ति को स्वाधीन, होकर जीना चाहिए। हर एक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि चाहे वह अपने, लिए जिए या औरों के लिए जिए, दूसरों का उद्धार करें या अपना उद्धार करें, मगर, उनको मानव जीवन के मूल्यों को समझना होगा।, , यदि कोई व्यक्ति मानव जीवन के मूल्यों को नहीं समझता है, तो वह मानव नहीं, हो सकता है। अर्थात हर मानव को स्वाधीन तरीके से जीना चाहिए और हर एक के, जीवन को सुखमय बनाने के लिए एक दूसरे की मदद करना चाहिए ना कि उनका, शोषण करना चाहिए।, , अति लघुउत्तरीय प्रश्न :, , 1. 'साये में धूप” गजल के कवि/शायर कौन हैं - दुष्यंत कुमार, जी, , 2. “साये में धूप” ग़ज़ल को दुष्यंत कुमार जी के किस ग़ज़ल, संग्रह से रिया गया हैं - साये में धूप, , 3. 'साये में धूप” में किस शैली का प्रयोग हुआ है - गजल शैली, , 4. कवि का सपना क्या था - एक सुखी , खुशहाल व समृद्ध, भारत का, , 5. “चिरागाँ” शब्द किसके लिए प्रयोग किया हैं - खुशहाली के, लिए, , 6. हर एक घर के लिए क्या तय किया गया था - चिरागाँ यानि, खुशहाली
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7. चिराग किसके लिए उपलब्ध नहीं है - एक शहर के लिए, , 8. किसके साए में धूप लगती है - पेड़ों के (दरख्तों के), , 9. “मयस्सर” किस भाषा का शब्द है - उर्दू भाषा, , 10.कवि समाज में परिवर्तन के लिए किसे आवश्यक मानता है, - जनता की आवाज को, , 11.निराश व्यक्ति के लिए क्या जरूरी है - आशा की एक, किरण, , 12.कमीज न होने पर गरीब इंसान अपना पेट किस से ढक, लेता है - पाँवों से, , 13.कवि किसे अपनी जुबान सिलने को कहता है - कवियों और, शायरों को, , 14.कवि किसके कारण अपनी जुबान सिलने की बात कहता है, - भ्रष्ट शासक वर्ग या सत्तावर्ग के कारण, , 15.अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के लिए जनता को कया करना, चाहिए - विरोध करना चाहिए, , 16.कौन जनता की आवाज को दबाने की कोशिश करता है अष्ट शासक वर्ग या सत्ताधारी लोग, , 17.किनको विश्वास हो चुका है कि अब समस्याएं कभी समाप्त, नहीं होंगी - पीड़ित व शोषित आम जनता को, , 18.गुलमोहर में क्या विद्यमान है - प्रतीकात्मकता, , 19.“गुलमोहर” शब्द किस चीज के लिए प्रयोग किया गया है व्यक्ति के आत्म सम्मान व स्वाभिमान के लिए, , 20.सुख न मिलने पर मनुष्य को क्या करना चाहिए - सुंदर, सपने देखने चाहिए