Notes of CLASS 10TH, Social Science 10-SS-Geography-chapter-4 - Study Material
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4, 1069CH04, कृषि, कृषि की दृष्टि से भारत एक महत्त्वपूर्ण देश है । इसकी, दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है । कृषि एक, प्राथमिक क्रिया है जो हमारे लिए अधिकांश खाद्यान्न, उत्पन्न करती है। खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह विभिन्न, यह 'कर्तन दहन प्रणाली' (slash and burn), कृषि है। किसान जमीन के टुकड़े साफ करके उन पर, अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य, खाद्य फसलें उगाते हैं। जब मृदा की उर्वरता कम हो, उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है । इसके जाती है तो किसान उस भूमि के टुकड़े से स्थानांतरित, हो जाते हैं और कृषि के लिए भूमि का दूसरा टुकड़ा, साफ करते हैं। कृषि के इस प्रकार के स्थानांतरण से, प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़, जाती है। चूँकि किसान उर्वरक अथवा अन्य आधुनिक, तकनीकों का प्रयोग नहीं करते, इसलिए इस प्रकार की, अतिरक्ति, कुछ उत्पादों जैसे, इत्यादि का भी निर्यात किया जाता है ।, चाय, कॉफी, मसाले, क्या आप कृषिगत कच्चे माल पर आधारित कुछ उद्योगों के, नाम बता सकते हैं?, कृषि में उत्पादकता कम होती है। देश के विभिन्न, भागों में इस प्रकार की कृषि को विभिन्न नामों से जाना, कृषि के प्रकार, कृषि हमारे देश की प्राचीन आर्थिक क्रिया है । पिछले, हजारों वर्षों के दौरान भौतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और, सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाज़ों के अनुसार खेती करने, की विधियों में सार्थक परिवर्तन हुआ है । जीवन निर्वाह, खेती से लेकर वाणिज्य खेती तक कृषि के अनेक प्रकार, जाता है।, उत्तर-पूर्वी राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम और, नागालैंड में इसे 'झूम' कहा जाता है; मणिपुर में पामलू, (pamlou) और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले और अंडमान, निकोबार द्वीप समूह में इसे 'दीपा' कहा जाता है ।, हैं। वर्तमान समय में भारत के विभिन्न भागों में निम्नलिखित, प्रकार के कृषि तंत्र अपनाए गए हैं।, झूम' - 'कर्तन दहन प्रणाली' (slash and burn) कृषि, को मैक्सिको और मध्य अमेरिका में 'मिल्पा', वेनेजुएला में, 'कोनुको', ब्राजील में 'रोका', मध्य अफ्रीका में 'मसोले',, इंडोनेशिया में 'लदांग' और वियतनाम में 'रे' के नाम से जाना, प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि, इस प्रकार की कृषि भारत के कुछ भागों में अभी भी की, जाती है। प्रारंभिक जीवन निर्वाह कृषि भूमि के छोटे, टुकड़ों पर आदिम कृषि औजारों जैसे लकड़ी के हल,, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी तथा परिवार, जाता है।, भारत में भी यह प्रारंभिक किस्म की खेती अनेक, नामों से जानी जाती है, जैसे मध्य प्रदेश में 'बेबर या, दहिया', आंध्रप्रदेश में 'पोडु' अथवा 'पेंडा ', ओडिशा में, 'पामाडाबी' या 'कोमान' या 'बरीगाँ', पश्चिम घाट में, 'कुमारी', दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में 'वालरे' या 'वाल्टरे',, हिमालयन क्षेत्र में 'खिल', झारखंड में 'कुरुवा' और उत्तर, पूर्वी प्रदेशों में 'झूम' आदि।, अथवा समुदाय श्रम की मदद से की जाती है। इस प्रकार, की कृषि प्राय: मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता और, फसल उगाने के लिए अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की, उपुयक्तता पर निर्भर करती है।, 2019-2020
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रहा है और किसान वैकल्पिक रोज़गार न होने के कारण, सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश, करते हैं। अत: कृषि भूमि पर बहुत अधिक दबाव है।, वाणिज्यिक कृषि, इस प्रकार की कृषि के मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशों, जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों, और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना, प्रदेशों में, है। कृषि के, करण का स्तर विभिन, अलग-अलग है। उदाहरण के लिए हरियाणा और पंजाब, में चावल वाणिज्य की एक फसल है परंतु ओडिशा में, चित्र 4.1, यह एक जीविका फसल है।, रिंझा असम में डिफु के बाहरी क्षेत्र में अपने परिवार के साथ, एक गाँव में रहती है। वह अपने परिवार के सदस्यों द्वारा एक, भूमि के टुकडे पर उगी वनस्पति को काटकर व जलाकर साफ, क्या आप उन फसलों के कुछ और उदाहरण दे सकते हैं जो, एक प्रदेश में वाणिज्यिक फसल के रूप में और दूसरे प्रदेश में, जीविका फसल के रूप में उगाई जाती हैं?, करते देख कर आनन्द का अनुभव करती है। वह प्रायः परिवार, के सदस्यों के साथ बाँस के नाले द्वारा झरने से पानी लाकर, अपने खेत को सिंचित करने में सहायता करती है। वह अपने, परिस्थान से लगाव रखती है और जब तक संभव हो यहाँ रहना, चाहती है। परंतु इस छोटी बच्ची को अपने खेत में मिट्टी की, घटती उर्वरता के बारे में कुछ भी पता नहीं है जिसके कारण, उसके परिवार को अगले वर्ष नए भूमि के टुकड़े की तलाश, करनी होगी।, रोपण कृषि भी एक प्रकार की वाणिज्यक खेती है। इस, प्रकार की खेती में लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई, जाती है। रोपण कृषि, उद्योग और कृषि के बीच एक, अंतरापृष्ठ (interface) है। रोपण कृषि व्यापक क्षेत्र में, की जाती है जो अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की, सहायता से की जाती है। इससे प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग, में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है ।, भारत में चाय, कॉफी,, महत्त्वपूर्ण रोपण फसले हैं। असम और उत्तरी बंगाल में, चाय, कर्नाटक में कॉफी वहाँ की मुख्य रोपण फसलें, हैं। चूँकि रोपण कृषि में उत्पादन बिक्री के लिए होता, क्या आप बता सकते हैं कि रिझा का परिवार किस प्रकार की, कृषि कर रहा है?, रबड़, गन्ना,, केला इत्यादि, क्या आप उन फसलों के नाम बता सकते हैं जो इस प्रकार की, कृषि में उगाई जाती हैं?, गहन जीविका कृषि, इस प्रकार की कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि, पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है। यह श्रम-गहन, खेती है जहाँ अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में, जैव- रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया, जाता है।, क्या आप भारत के कुछ राज्यों के नाम बता सकते हैं जहाँ इस, प्रकार की कृषि की जाती है?, भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण पीढ़ी, दर पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा, चित्र 4.2 - भारत के दक्षिणी भाग में केले की रोपण कृषि, 37, कृषि, 2019-2020
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में गेहूँ उगाने वाले दो मुख्य क्षेत्र हैं।, उत्पादक देश है। यह एक खरीफ की फसल है जिसे, उगाने के लिए उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर), और अधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा ) की, उत्तर-पश्चिम में, गंगा-सतलुज का मैदान और दक्कन का काली मिट्टी, वाला प्रदेश। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश,, आवश्यकता होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई बिहार, और राजस्थान के कुछ भाग गेहूँ पैदा करने वाले, करके उगाया जाता है।, मुख्य राज्य हैं।, ज्वार, बाजरा और रागी, भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज हैं। यद्यपि, इन्हे मोटा अनाज कहा जाता है परंतु इनमें पोषक त्त्वों, की मात्रा अत्यधिक होती है। उदाहरणतया, रागी में प्रचुर, मोटे अनाज (Millets), मात्रा में लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी मिलती, है। क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से ज्वार देश की, तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। यह फसल वर्षा पर, निर्भर होती है। अधिकतर आर्द्र क्षेत्रों में उगाए जाने के, कारण इसके लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।, चित्र 4.4 (ख), मैदान में कटाई के लिए तैयार चावल की फसल, आंध्र, इसके प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, कर्नाटक,, प्रदेश और मध्य प्रदेश हैं।, चावल उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और, डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है। नहरों के जाल और, नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों, बाजरा, यह बलुआ और उथली काली मिट्ी पर, उगाया जाता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, और हरियाणा इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं। रागी शुष्क, प्रदेशों की फसल है और यह लाल, काली,, में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है।, बलुआ,, गेहूँ, दोमट और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगायी, गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न, फसल है। जो देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में जाती है। रागी के प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक हिमाचल, पैदा की जाती है। रबी की फसल को उगाने के लिए प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल, शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप की आवश्यकता, होती है। इसे उगाने के लिए समान रूप से वितरित 50, से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है । देश, प्रदेश हैं।, मक्का, यह एक ऐसी फसल है जो खाद्यान्न व चारा, दोनों रूप में प्रयोग होती है। यह एक खरीफ फसल है, चित्र 4.5, गेहूँ की कृषि, चित्र 4.6, बाजरे की कृषि, 40, समकालीन भारत-2, 2019-2020