Notes of Class-10, Hindi IMG_20220117_112341.jpg - Study Material
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1. भोलनाथ जब अपने पिता की गोद में बैठा हुआ आईने में अपने प्रतिबिम्ब को देखकर खुश, होता रहता है। वहीं पिता द्वारा रामायण पाठ छोड़कर देखने पर लजाकर व मुस्कुराकर आईना, रख देना । यहाँ बच्चों का अपने अक्ष के प्रति जिज्ञासा भाव बड़ा ही मनोहर लगता है और उसका, शर्माकर आईना रखना बहुत ही सुन्दर वर्णन है।, , 2. बच्चों द्वारा बारात का स्वांग रचते हुए दुल्हन को लिवा लाना व पिता द्वारा दुल्हन का घुघंट, उटाने पर सब बच्चों का भाग जाना, बच्चों के खेल में समाज के प्रति उनका रूझान झलकता है, तो दूसरी और उनकी नाटकीयता, स्वांग उनका बचपना।, , 3. बच्चे का अपने पिता के साथ कुश्ती लड़ना। शिथिल होकर बच्चे के बल को बढ़ावा देना, और पछाड़ खा कर गिर जाना। बच्चे का अपने पिता की मूंछ खींचना और पिता का इसमें, प्रसन्न होना बड़ा ही आनन्दमयी प्रसंग है।, , 6. इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण, संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।, , उत्तर, , तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति में किसी प्रकार के दिखावे अभाव था ।लोग बहुत ही सीधेसादे हुआ करते थे ।लोग परस्पर मिल-जुल कर रहा करते थे।किसी भी पर्व -त्योहार को पूरे, उत्साह के साथ मनाते थे ।गाँव में बचपन से खेल - खेल में ही वैसी सभी बातों को सिखाया, जाता है जिससे बच्चे बड़े होकर अपने कार्यक्षेत्र में प्रवीण हो सकें और व्यवहारिक भी बन, सकें।, , आज की ग्रामीण संस्कृति में काफी बदलाव आए हैं । अब गाँव में दूषित राजनीति के पाँव, पसारने के कारण लोगों के अन्दर जाति,धर्म,सम्प्रदाय और अमीर-गरीब जैसे भेद पनप गए हैं, ।आज के गाँव में लगभग सारी शहरी सुविधाएँ लोगों को प्राप्त हो रही हैं।, बिजली,पानी,स्कूल,अस्पताल,सड़क और खेती के वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध हैं।, , पृष्ठ संख्या: 9, , 8. यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।, उत्तर, , भोलानाथ के पिता अपने पुत्र के प्रति बहुत स्नेह रखते थे | सुबह से लेकर शाम तक जितना भी, समय मिलता उसे वे अपने भोलानाथ के साथ बिताते थे ।भोलानाथ को सुबह जगाना,नहलाना, ,अपने साथ पूजा के लिए बिठाना , पने साथ मछलियों को चारा खिलाने ले जाना और उसके, खेलों में शामिल होना उनके गहरे लगाव को बताता है।, , भोलानाथ की माता वात्सल्य व ममत्व से भरपूर माता है। भोलानाथ को भोजन कराने के लिए, , उनका भिन्न-भिन्न तरह से स्वांग रचना एक ख्रेही माता की ओर संकेत करता है। जो अपने पुत्र, के भोजन को लेकर चिन्तित है। दूसरी ओर उसको लहुलुहान व भय से काँपता देखकर माँ भी, स्वयं रोने व चिल्लाने लगती है। अपने पुत्र की ऐसी दशा देखकर माँ काह्ददय भी दुखी हो जाता