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36. घर पहुँचने पर माटसाब के व्यवहार के बारे में बेला और माँ के बीच हुए वार्तालाप, माँ. - कया हुआ बेटी, बहुत परेशान दिखती हो?, बेला - क्या कहूँ माँ, आज स्कूल में एक घटना हुई।, माँ. - किसीके साथ झगडा हुआ होगा?, बेला - नहीं। गणित के माटसाब ने मेरे बालों में पंजा फँसाया।, माँ - सुरेंदर जी! तुमने जरूर कोई गलती की होगी।, बेला - नहीं माँ। मैंने जो लिखा था वह ठीक ही था।, माँ. - छोड दो। मास्टर जी है न?, बेला - लेकिन साहिल के सामने वह अपमान मैं सह न सकी।, माँ - कोई बात नहीं । वह तुम्हें अच्छी तरह समझता है।, 37. चरित्र चित्रण- गणित के माटसाब सुरेंदरजी का, , सुरेदर माटसाब बेला और साहिल के गणित अध्यापक थे। स्कूल के सभी बच्चे उनका नाम सुनने 'पर॑ यो७दूर से देखने पर, कॉपना शुरू करते थे। इसलिए घंटी बजने के दो मिनट पहले ही अपने स्थान पर आकर बैठते थे। वे बीब<बीचें में गणित की कॉपी, जाँचते थे। ज़रा-सी गलती पर भी झापड मारना, बालों में पंजा फँसाना, कॉपी दूर फेंकना आदि उनेकीं बुरी आदतें थीं। भयभीत होकर, छात्र क्लास में साँस पकडकर बैठते थे। छात्रों के अपमान करने में उनको तनिक भी हिचक नहीं थी।'ब॒च्चों की गलतियों को माफ करना, उनकी बस की बात नहीं थी। बच्चे उनसे बिलकुल प्यार नहीं करते थे।, 38. क्लास में हुए बुरे अनुभव का जिक्र करते हुए सहेली के नाम बेला का पत्र स्थान:, , तारीख:, , , , , , प्रिय सहेली,, , तुम कैसी हो? कुशत्र हो न? मैं यहाँ ठीक हूँ। तुम्हारी कोई खबर«लहीं 'कुछेःदिनों से, एक खास बात बताने केलिए मैं यह पत्र, भेज रही हूँ।, , आज स्कूल में एक घटना हुई। तीसरी पिरीयड गणित का थॉ+ गणित के माटसाब का नाम सुनते ही हम काँप जाते थे। आज वे, मेरी कॉपी जाँच रहे थे। तभी उन्होंने मेरे बालों में पंजा फँसाया। *लेंकिने* कॉपी में कोई गलती नहीं थी। उन्होंने मुझे छोड दिया। मैं डर, से कॉप रही थी। उन्होंने कॉपी मेरी सीट पर फेंक दी। फिर अप्न्नी जगह पर बैठने का आदेश दिया। तुम जानती हो, वे कितने क्रूर हैं, उनकी क्लास हमें बहुत भयानक लगता है।, , वहाँ तुम्हारी पढाई कैसे चल रही है? वहाँ. तुम्हें सुरेंदेर जी जैसा कोई अध्यापक है क्या? तुम्हारे माँ बाप से मेरा प्रणाम कहना।, , जवाब प्र की प्रतीक्षा से, तुम्हारा दोस्त, सेवा में, [हस्ताक्षर], नाम नाम, पता, 39. पटकथा-3 (गाँधी चौंक के लंगडी टॉँग खेल), स्थान - स्कूल का मैदान!, समय “सुबह, 0: बजे।, पात्र >*साहिल और बेला (दोनों 0- साल के, स्कूत्र की वर्दी पहने हैं।), दृश्य का विवरण - दीपावली के बाद स्कूल खुला तो बेला के सिर पर सफेद पट्टी बाँधी थी। यह देखकर साहिल उसके पास आता है।, संवाद* साहिल- (परेशान होकर) तेरे सिर पर यह क्या हो गया बेला?, , बेला - (हँसकर) छत से गिर जाने से चोट लग गयी।, , साहिल - यह कब हुआ?, बेला - बहुत दिन हो गए।, साहिल - अब दर्द है क्या?, बेला - नहीं। आज खेल घंटी में हम गाँधी चौक में लंगडी टॉँग खेलेंगे।, साहिल - नहीं खेलेंगे।तेरे सिर में फिर से चोट लग जाएगी तो....?, बेला - (ज़िद करते हुए) नहीं त्गेगी।, साहिल - तो ठीक है। अपनी मर्जी।, (दोनों खुशी से कक्षा में जाकर बैठते हैं।)