Assignment of 11B, Hindi आओ मिलकर बचाएं - Study Material
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है आम प०!७॥ | हिंदी द [, , , , , , , , ही, , ९, 184 | धर सकते हैं। कवयित्री ने अपने प्राकृतिक, किए हैं, अपने मुतरूप खत सुखद अतुल, तय 22), हर क्कां, वर्णनात्मक प्रश्न पक] ५) ओम के, (##, 1. “बस्ती को बचाएँ डूबने से' का आशय स्पष्ट कीजिए। 60) गीतों क्की शर्त सुगंध, उत्तर “बस्ती को बचाएँ डूबने से” का अर्थ यह है कि आज पारंपरिक (0) मिदूटी की कसलें ओंर्दि।, रीति-रिवाज़ अपनी मौलिकता खो रहे हैं जिससे उनका अस्तित्व ) लहलहाती फी री , 'रोने के लिए मुट्ठी भर एकाह, , धीरे-धीरे लुप्त होता जा रहा है, जो चिंता का त्रिषय बन गया है। थोड़ी:, आदिलासियों, के डूबने 'हँसने के लिए है?, अर्थात् आदिवासियों की संस्कृति का लुप्त होना बस्ती के डूब' 6. थ कक्यी मा 2 से दे कक, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , के समान है। इसे बचाना ज़रूरी है और इसके लिए शराब शा ड, (हड़िया) के सेवन की प्रवृत्ति को बढ़ने से रोकना होगा। उत्तर कबयित्री झारखंड के इन पंक्तियों के द्वारा यह कहना चाहती है कि, उत्तर "करा आग्रह करते हुए हंसी हो, हम उन्मुक्त रूप से हँसे और रोने, 2. बस्तियों को शहर की किस आबो-हवा से बचाने की रख: जीवन में स्वाभाविक हँसी हो, किक नोसोमिक ढंग, आवश्यकता है? हमारे अर तभी क से, के लिए भी थोड़ा-सौँ, उत्तर आदिवासी बस्तियों पर शहर के परिवेश का प्रभाव बढ़ता जा रहा गुजर सकती है। जय, है। शहरों की असभ्यता, अनुशासनहीनता, चकाचौंध व प्रदूषित कविता आदिवां, पर्यावरण से बस्तियाँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। आदिवासी 7. प्रस्तुत ], बस्तियाँ सांस्कृतिक प्रदूषण से भी नहीं बच पाएँगी। कवियत्री करती है? की ओर संकेत, आदिवासियों से आह्वान करती है कि आओ, हम सब मिलकर उत्तर प्रस्तुत कविता अ त, अपनी इन बस्तियों को शहर के दुष्प्रभाव से बचाएँ। कवयित्री करती 1 कट, चाहती है कि बस्तियों का पर्यावरण शहर के पर्यावरण के कारण 6) संथाली समाज: 1 *खराब नहीं हो, इसलिए उसे बचाए रखना बहुत ही आवश्यक है। हा उनके जाय रहा है, जिस कारण वे, 3. "माटी का रंग' का प्रयोग करते हुए किस बात की ओर संकेत अपनी ही मं, किया गया है? (५८६श) (४४) उनके जीवन मे, उत्तर माटी का रंग' का प्रयोग करते हुए कवयित्री का अभिप्राय यह है (०) लोगों में शराब, कि हम जिस मिट्टी में जन्म लेकर पले और बड़े हुए हैं, उस (७) वह अपने मौहि, मिट्टी के प्रति हमें प्यार व समर्पण का भाव रखना चाहिए। )) उनमें आत्म ४, कवतवित्री के माटी का रंग' प्रयोग के पीछे एक ओर अभिप्राय (2! उनमें दस] थे ५ है, यह है कि वह संथाल की भूमि की मूल पहचान को उजागर (४४४) उनमें दूसरों न 5529 रही है।, करना चाहती है। वहाँ की भाषा, अक्खड़ता, नाच-गाना, स्वच्छ 8. निम्नलिखित पंक्ति *कीजिए। (६८६४|, वातावरण, कुल्हाड़ी, धनुष-बाण आदि सभी माटी के रंग की (क) ठंडी ञ् है, ओर ही संकेत कर रहे हैं। हि, 4. दिल के भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारुपन को भी ' (्र, , बचाने की आवश्यकता पर बल क्यों दिया जाता है? (घ८हर), उत्तर दिल के भोलेपन” का तात्पर्य सरल, सहज स्वभाव और, अक्खड़पन का भाव है। अपने निश्चय पर दृढ़ रहना और, “जुझारुपन” का अभिप्राय संघर्ष करना, ये सभी बातें आदिवासी, समाज के लोगों की विशेष पहचान हैं। जो लोग भोले होते हैं,, उनको बहलाना कोई कठिन काम नहीं है। इसलिए भोलेपन के 9, साथ-साथ स्वभाव का कठोर होना भी ज़रूरी है अर्थात्, बात पर टिके रहना और अपने कार्य के लिए स॑, कवयित्री चाहती है कि ये सभी बातें आदिवासी सम, में होनी चाहिए और इन्हें बचाए रखने का 7, , 5. व, , , , वयि