Notes of XI, HINDI CORE पत्र लेखन 5एक.pdf - Study Material
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अभिवादन अथवा शिष्टाचार संबंधी शब्दों का उल्लेख, पत्र में संबोधन के अनुरूप ही अभिवादन या शिष्टाचार संबंधी शब्दों का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग अनौपचारिक पत्रों में बड़ों के लिए प्रणाम ,, नमस्कार, सादर चरण-स्पर्श तथा छोटों के लिए आशीर्वाद, शुभाशीष, चिरंजीव रहो आदि शब्द-सूचक का प्रयोग किया जाता है। औपचारिक पत्रों में, इसका प्रयोग नहीं किया जाता।, अध्याय 02, स, विषय-वस्तु, विषय-वस्तु पत्र लेखन का महत्त्वपूर्ण अंग है। इसे पत्र का मुख्य भाग भी कहते हैं इस भाग में अपने भावों एवं विचारों को प्रकट किया जाता है।, समाप्ति अथवा अंत, पत्र लेखन, पत्र के अंत में अपने विषय में लिखते हुए पत्र को समाप्त किया जाता है। औपचारिक पंत्र में धन्यवाद लिखते हुए 'भवदीय', 'प्रार्थी', 'आज्ञाकारी' आदि, शब्द-सूचक का प्रयोग किया जाता है तथा अनौपचारिक पत्र में 'प्यारा', 'स्नेहाकांक्षी', 'हितैषी', 'शुभाकांक्षी' इत्यादि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।, औपचारिक व अनौपचारिक पत्र लिखने के लिए ध्यान देने योग्य बातें, * पत्र लिखते समय लिखने वाले तथा पत्र प्राप्त करने वाले का नाम व पता, दिनांक के साथ लिखा जाना चाहिए।, * पत्र का विषय स्पष्ट होना चाहिए। अनावश्यक बातों को पत्र में नहीं लिखना चाहिए।, * पत्र लिखते समय क्रमबद्धता का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।, इस अध्याय में..., * पत्र का आकार संक्षिप्त होना चाहिए तथा विषय के अनुकूल होना चाहिए। कम शब्दों में अधिक बात कहने की कोशिश करनी चाहिए।, * पत्र के अंग, * पत्र की भाषा सरल, सामान्य, मधुर एवं आदर सूचक एवं शुद्ध होनी चाहिए।, * पत्र अधूरा नहीं होना चाहिए। पत्र को इस प्रकार समाप्त किया जाना चाहिए कि पत्र का संदेश स्पष्ट हो सके।, औपचारिक पत्र, अनौपचारिक पत्र, * चैप्टर प्रैक्टिस, औपचारिक पत्र, प्रधानाचार्य, पदाधिकारियों, व्यापारियों, ग्राहकों, पुस्तक विक्रेता, संपादक आदि को लिखे गए पत्र 'औपचारिक पत्र' कहलाते हैं। औपचारिक पत्र उन लोगों, को लिखे जाते हैं, जिनसे हमारा निजी या पारिवारिक संबंध नहीं होता है। इनमें औपचारिकता और कथ्य संदेश ही मुख्य होता है। इसमें तथ्यों और, सूचनाओं को ही अधिक महत्त्व दिया जाता है।, औपचारिक पत्रों को निम्नलिखित व्गों में विभाजितः किया जा सकता है, अपनी भावनाओं को लिखित रूप में दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाने के संबंध में पत्र लेखन एक आवश्यक कौशल है अपने विचारों, एवं भावों की अभिव्यक्ति के लिए पत्र- लेखन का प्रयोग किया जाता, आदि से जोड़ने की कला पत्र लेखन कहलाती है पत्र लेखन हमारे जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग है, जो लोगों को समाज से, जोड़कर रखती है।, अपने सगे-संबंधियों, पदाधिकारियों, मित्रों, संपादकों, 1. प्रार्थना-पत्र प्रार्थना-पत्र सामान्यतः अपने से बड़े अधिकारी या स्कूल कॉलिज में प्राचार्य, शिक्षक को लिखा जाता है जिसमें किसी कार्य को करने, की अनुमति माँगी जाती है या किसी कार्य को कराने के लिए आग्रह किया जाता है।, 2. कार्यालयी पत्र विभिन्न सरकारी कार्यालयों में पत्र के माध्यम से कार्य संपादित होते हैं। ऐसे पत्रों को 'कार्यालयी पत्र' कहा जाता है। इन पत्रों में, शालीनता तथा शिष्ट भाषा का प्रयोग किया जाता है।, 3. संपादकीय पत्र संपादक के नाम पत्र को 'संपादकीय पत्र' भी कहा जाता है। ऐसे पत्र एक विशिष्ट शैली में लिखे जाते हैं । यह पत्र संपादक को, संबोधित होता है, जबकि मुख्य विषय-वस्तु 'जन सामान्य' को लक्ष्य कर लिखी जाती है।, 4. शिकायती पत्र किसी विशेष कार्य, समस्या अथवा घटना की शिकायत करते हुए संबंधित अधिकारी को लिखा गया पत्र 'शिकायती पत्र' कहलाता, है। इसका स्वरूप प्रार्थना-पत्र की तरह ही होता है। इसकी भाषा शालीन होनी चाहिए।, 5. व्यावसायिक पत्र व्यावसायिक संबंधों को सुनिश्चित करने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं, उन्हें 'व्यावसायिक पत्र' कहा जाता है। ऐसे पत्रों की, भाषा स्पष्ट तथा आकर्षक होनी चाहिए, जिससे बाते पूर्णतः स्पष्टता के साथ संप्रेषित हो सकें। व्यावसायिक पत्रों में सामान मँगवाने, उसकी, जानकारी, शिकायतें तथा शिकायतों के निवारण जैसे विषय होते हैं।, पत्र के सामान्यत: दो प्रकार होते हैं, 1. औपचारिक पत्र (Formal Letters ), 2. अनौपचारिक पत्र (Informal Letters), पत्र के अंग, पत्र को जिस क्रम में लिखा जाता है, वे पत्र के अंग कहलाते हैं सामान्यत: किसी भी पत्र में निम्नलिखित अंग होते हैं, शीर्षक या प्रारंभ, पत्र में सर्वप्रथम शीर्षक के रूप में पत्र लिखने वाले का नाम व पता लिखा जाता है। तत्पश्चात् पत्र लिखने की तिथि का उल्लेख, किया जाता है। परीक्षा में पूछे गए औपचारिक एवं अनौपचारिक पत्र में स्थान का उल्लेख न होने पर परीक्षा भवन लिखा जाता, है। यह सब पत्र के बाईं ओर सबसे ऊपर लिखा जाता है। औपचारिक पत्रों के अंतर्गत विषय का उल्लेख सीमित शब्दों में स्पषएट, रूप से किया जाता है। अनौपचारिक पत्रों में इसका उल्लेख नहीं होता।, औपचारिक पत्र के संबोधन, अभिवादन तथा अभिनिवेदन, पत्र के प्रकार, पत्र पाने वाले, संबोधन, अभिवावन, अभिनिवेदन, संबोधन का उल्लेख, प्रार्थना-पत्र, प्रधानाचार्य, संबंधित अधिकारी, महोदय, महोदया, मान्यवर, आपका, कृपाकांक्षी, भवदीय, पत्र में संबोधन का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। औपचारिक पत्र के अंतर्गत 'मान्यवर', 'महोदय' आदि संबोधन शब्दों का प्रयोग, किया जाता है तथा अनौपचारिक पत्र के अंतर्गत 'पूजनीय', 'स्नेहमयी' 'प्रिय' आदि संबोधन शब्दों का प्रयोग किया जाता है।, कार्यालयी पत्र, संबंधित अधिकारी, मान्यवर, महोदय, भवदीय, विनीत, संपादकीय पत्र, संपादक, महोदय, महोदया, भवदीय/भवदीया, प्रार्थी, शिकायती पत्र, संबंधित अधिकारी, महोदय, महोदया, भवदीय, भवदीया, प्रार्थी, व्यावसायिक पत्र, पुस्तक विक्रेता, बैंक प्रबंधक, व्यावसायिक संस्था, श्रीमान, महोदय, भवदीय, प्रार्थी